<p style="text-align: justify;">आकलन पूर्व-प्राथमिक कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण एवं अभिन्न अंग है। यह बच्चों की रुचियों, उपलब्धियों तथा सीखने में उनकी संभावित कठिनाइयों के विषय में जानकारी प्रदान करता है। आकलन का उद्देश्य शिक्षकों/ परिवार, देखभाल करने वालों के द्वारा बच्चों के सीखने और विकासात्मक स्तरों के विषय में उपयोगी सचनाएँ प्रदान करना है। यह विकासात्मक देरी, बच्चों की विशेष शैक्षणिक आवश्यकताओं तथा उनकी विशेष रुचियों एवं क्षमताओं की जल्द पहचान सुनिश्चित करता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">आकलन करते समय ध्यान रखने योग्य बातें</h3> <ul style="text-align: justify;"> <li> आकलन बच्चों की गतिविधियों, उनके स्वास्थ्य, पोषण,शारीरिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति के गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन पर आधारित होना चाहिए। प्रत्येक बच्चे का आकलन उसके खेल तथा अन्य गतिविधियों के अनौपचारिक व्यवस्थित अवलोकनों के माध्यम से होना चाहिए।</li> <li> किसी भी कारण से बच्चे की किसी भी प्रकार की लिखित या मौखिक परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए।</li> <li> पूर्व-प्राथमिक स्तर पर आकलन का उद्देश्य बच्चे पर उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण का ठप्पा लगाना नहीं है।</li> <li> आकलन का उद्देश्य नये कौशल सीखने के लिए दिशानिर्देशप्रदान करना होना चाहिए।</li> <li> आकलन बच्चे की कमी के स्थान पर उसकी शक्तियों पर केंद्रित होना चाहिए।</li> <li> बच्चे की प्रगति को नियमित आधार पर विकास के हर पहलू के लिए रिकॉर्ड किया जाना चाहिए।</li> <li> आकलन द्वारा उन बच्चों को पहचानने में सहायता करनी चाहिए जिन्हें कुछ विशेष सहायता की आवश्यकता हो सकती है।</li> <li> शिक्षक को बच्चों के आकलन के आधार पर गतिविधियों की योजना बनानी चाहिए।</li> <li> शिक्षक एवं अभिभावकों दोनों को ही मिलकर बच्चे की प्रगति की निगरानी करनी चाहिए।</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">आकलन और उसकी रिपोर्ट कैसे की जानी चाहिए</h3> <p style="text-align: justify;"> पूर्व-प्राथमिक विद्यालय में आकलन रचनात्मक, सतत् तथा पाठ्यचर्या में नियोजित अनुभवों से जुड़ा होना चाहिए। बच्चों के दैनिक अनुभवों के आधार पर उनका अवलोकन और उनके विकास को दर्ज करना ही रचनात्मक और सतत् मूल्यांकन में शामिल है ताकि उनकी क्षमताओं को पहचाना और प्रोत्साहित किया जा सके तथा उनकी अधिगम/विकासात्मक कमियों को दर किया जा सके। प्रत्येक बच्चे की प्रगति का आकलन सतत् एवं व्यापक आधार पर किए जाने की आवश्यकता है। यह उनके व्यवहार के अवलोकन, उनके कला कार्यों, विस्तृत रिकार्ड्स, चेकलिस्ट्स, पोर्टफोलियो और दूसरे बच्चों के साथ उनके संवादों के माध्यम से करना चाहिए। दीर्घस्तरीय लक्ष्य प्राप्त करने के लिए वर्तमान प्रदर्शन को धीरे-धीरे आगे बढ़ाते हुए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।शिक्षक को हर बच्चे की प्रगति को विभिन्न तरीकों से दर्ज करना चाहिए। यह प्रलेखन प्रशासकों एवं शिक्षकों को उपयुक्त सूचना देगा कि कार्यक्रम को कैसे बेहतर किया जाए, उनमें आवश्यक परिवर्तन लाए जाएँ, आगे बढ़ाने की योजना बनाई जाएँ और कौन-से प्रश्न पूछे जाएँ तथा कौन से संसाधन प्रदान किए जाएँ। प्रत्येक बच्चे का फोल्डर अभिभावकों एवं बच्चों के पास देखने के लिए उपलब्ध होना चाहिए और यह तब तक होना चाहिए जब तक बच्चे किसी और पूर्व-प्राथमिक कार्यक्रम या प्राथमिक स्कूल में न चला जाए। सभी अभिभावकों को अपने बच्चों की प्रगति की लिखित एवं मौखिक रिपोर्ट वर्ष में दो बार अवश्य मिल जानी चाहिए।</p> <h3 style="text-align: justify;">आकलन उपकरण एवं तकनीक </h3> <p style="text-align: justify;">आकलन विविध उपकरणों एवं तकनीकों के द्वारा किया जा सकता है</p> <ol style="text-align: justify;"> <li><strong> वृत्तांत अभिलेख (ऐनक्डोटल रिकार्ड)</strong>— बच्चों के अवलोकनों के आधार पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखी जा सकती हैं उदाहरण के लिए, बच्चों ने कैसे और कहाँ समय बिताया, उनके सामाजिक रिश्ते कैसे हैं, भाषा के प्रयोग, संवाद के माध्यम, स्वास्थ्य एवं पोषण आदतों के बारे में सूचना आदि।</li> <li><strong> पोर्टफोलियो</strong>— पोर्टफोलियो समय-समय पर बच्चों __ द्वारा किए गए विभिन्न कार्यों के नमूनों का एक लचीला तथा संक्षिप्त संकलन है जो बच्चों के सीखने के बहुतसे आयाम प्रदर्शित करता है। इस प्रकार का आकलन बच्चों की शक्तियों, ज्ञान तथा कौशलों के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करता है। बच्चों की कला, चित्रकला, कौशल कार्य, कोलाज़ आदि के नमूने भी पोर्टफोलियो में शामिल होते हैं।</li> <li><strong>अवलोकन-</strong> किसी बच्चे या बच्चों के समूह का अवलोकन नियोजित और उद्देश्यपूर्ण तरीके से किया जा सकता है। यह सीखने-सिखाने की दैनिक गतिविधियों में की जा रही स्वाभाविक प्रक्रिया है। वैज्ञानिक रूप से किए गए अवलोकन बच्चे के व्यक्तित्व के विविध आयामों तथा सीखने की प्रगति के बारे में उपयुक्त सूचना प्रदान करते हैं।</li> <li> <strong>चेकलिस्ट-</strong> चेकलिस्ट एक विशेष विकास क्षेत्र में बच्चे के सीखने के प्रतिफलों, व्यवहार या विशेषताओं की सूची होती है। शिक्षक को यह निर्धारित करना होता है कि बच्चे में यह सब विशेषताएँ हैं या नहीं। अवलोकनात्मक अवधि के दौरान बच्चे के द्वारा प्रदर्शित व्यवहार के सामने 'हाँ' या ‘ना’ चिह्नित करना होता है।</li> <li><strong> रेटिंग पैमाना</strong>- एक रेटिंग पैमाना कार्यों के प्रदर्शन,कौशल स्तर, प्रक्रियाओं, प्रथाओं, विशेषताओं, मात्राओं या अंतिम उत्पाद का आकलन करने के लिए प्रयोग होने वाला उपकरण है। रेटिंग पैमाना, चेकलिस्ट की ही भाँति है, बस वह उपलब्धियों को केवल 'हाँ' या 'नहीं' चिह्नित करने के स्थान पर, यह बताता है कि कितनी उपलब्धि हुई है।</li> <li> <strong>चित्र एवं वीडियो क्लिप</strong>- वीडियो औरऑडियो क्लिप बच्चों की प्रगति तथा कार्यक्रम की प्रगति का आकलन करने में एवं बच्चों की प्रेरणा व आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायता करते हैं। शिक्षक निजता की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए रिकॉर्डिंग को सुनकर और देखकर उचित कक्षा प्रक्रियाओं को उसी के अनुसार निर्मित एवं संशोधित कर सकते हैं।</li> </ol> <h3 style="text-align: justify;">पूर्व-प्राथमिक कार्यक्रम का आकलन</h3> <p style="text-align: justify;">पूर्व-प्राथमिक बच्चों के आकलन के अतिरिक्त यह भी आवश्यक है कि पूर्व-प्राथमिक कार्यक्रम का आकलन भी किया जाए।पूर्व-प्राथमिक कार्यक्रम का आकलन प्रत्येक बच्चे की विकासात्मक प्रगति को पहचानने तथा समय के साथ प्रगति की निगरानी करने के लिए पूर्वप्राथमिक कार्यक्रम में दी जाने वाली जानकारी और ज्ञान की निगरानी करने की आवश्यकता होती है। हर बच्चे की विकासात्मक और समय के साथ क्रमिक प्रगति की पहचान करने के लिए पूर्व-प्राथमिक कार्यक्रम में निर्देशों की सूचना देने तथा उनकी निगरानी करने की आवश्यकता होती है। बच्चे ज्ञान और कौशल कैसे प्राप्त कर रहे हैं, उनकी मनोवृत्ति और दृष्टिकोण कैसे विकसित हो रहा है। इन बातों की जागरूकता, पाठ्यचर्या गतिविधियों में संशोधन और उनकी उपयुक्तता के विषय में सूचना प्रदान करती है।</p> <p style="text-align: justify;">पूर्व-प्राथमिक अवस्था में आकलन करने का मुख्य उद्देश्य कार्यक्रम तथा बच्चों को दी जा रही अन्य मूलभूत सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर करना है। पूर्व-प्राथमिक विद्यालय के लक्ष्यों और आरंभिक अधिगम प्रतिफलों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर पूर्व-प्राथमिक विद्यालय कार्यक्रम का पुनरावलोकन किया जाना चाहिए। यह पुनरावलोकन पूर्व-प्राथमिक कार्यक्रम के घटकों के निर्माण और कार्यान्वयन के अनुकूल होना चाहिए।</p> <p style="text-align: justify;">पूर्व-प्राथमिक विद्यालयी स्टाफ, जैसे निरीक्षक, प्रभारी तथा मुख्य शिक्षक/मुख्य शिक्षिका को भी मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए। वे अवलोकन करके समीक्षा और सुधार के लिए आवश्यक सूचनाएँ एकत्र कर सकते हैं। मूल्यांकन के परिणाम आवश्यक परिवर्तनों के बारे में किए गए निर्णयों की दिशा निर्धारित करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पूर्व-प्राथमिक विद्यालय कार्यक्रम और उसकी सेवाओं में गुणवत्ता आती है।</p> <p style="text-align: justify;">समय-समय पर निगरानी एवं मध्य-सत्र मूल्यांकन यह समझने में सहायता करता है कि यह कार्यक्रम कैसे चल रहा है और सभी बच्चे प्रारंभिक अधिगम प्रतिफल हासिल करने के लिए क्या प्रगति कर रहे हैं, तथा शिक्षकबच्चे व अभिभावक के बीच आपसी संवाद कैसे सुधार रहे हैं। यह सकारात्मक सुधार को बेहतर करता है और घर से पूर्व-प्राथमिक विद्यालय तथा पूर्व-प्राथमिक विद्यालय से प्रारंभिक प्राथमिक कक्षाओं में पारगमन को मज़बूत करता है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत: पूर्व प्राथमिक शिक्षा के लिए दिशा-निर्देश,राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), श्री अरविंदाे मार्ग, नई दिल्ली।</p>