सदियों पहले हिन्दुस्तान की तूती- अबुल हसन’ उर्फ़ अमीर खुसरो ने एक प्रसिद्ध कथन कहा है, “हिन्दुस्तानियम मन हिंदी गोयम जवाब”, अर्थात, मैं हिन्दुस्तानी हूँ, हिन्दवी में जवाब देता हूँ. विगत दिनों में भारत ने आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया. आजादी का अमृत महोत्सव भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक पहचान के बारे में प्रगतिशील है. जो प्रगतिशील भारत के 75 साल और इसके लोगों, संस्कृति और उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने के लिए है. 'हिंदी' शब्द के विभिन्न अर्थ व्युत्पत्तिपरक अन्य शब्दों के समान हिंदी शब्द भी अनेकार्यवाची है. यहाँ हिंदी शब्द साहित्य के लिए आया है. प्रयोग तथा रूप की दृष्टि से हिंदी शब्द फारसी भाषा का है. संस्कृत, प्राकृत अथवा आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं के किसी भी प्राचीन ग्रंथ में इसका व्यवहार नहीं किया गया है. फारसी में हिंदी का शब्दार्थ हिंद से संबंध रखनेवाला है, किंतु इसका प्रयोग हिंद की वस्तु, हिंद के रहनेवाले अथवा हिंद की भाषा के अर्थ में होता रहा है. इसी आधार पर मिस्र (आधुनिक इजिप्त) में जो मलमल 'हिंद' से मंगवाई जाती थी, यह हिंदी कहलाती थी और हिंद निर्मित इस्पात को तलवार अरबी-फारसी में हिंदी कहलाती थी. हिंद के रहनेवाले अर्थ में हिंदी का प्रयोग इकबाल ने अपने प्रसिद्ध तराना-ए-हिंदी में- हिंदी हैं हम, वतन है हिंदोस्ताँ हमारा की काव्य पंक्तियों में वर्णन किया है. परंतु यहाँ हमारा हिंदी के भाषा संबंधी अर्थ से ही विशेष प्रयोजन है. भाषापरक अर्थ: शब्दार्थ की दृष्टि से हिंदी शब्द का प्रयोग हिंद या भारत में बोली जानेवाली किसी भी आर्य, द्रविड़ अथवा अन्य कुल की भाषा के लिए हो सकता है, किंतु व्यवहार में हिंदी उस बड़े भूभाग (मध्यदेश) की भाषा मानी जाती है, जिसकी सीमा पश्चिम में जैसलमेर उत्तर-पश्चिम में अंबाला, उत्तर में शिमला से लेकर नेपाल के पूर्वी छोर तक के पहाड़ी प्रदेश के दक्षिणी भाग, पूर्व में भागलपुर दक्षिण-पूर्व में रायपुर तथा दक्षिण-पश्चिम में खंडवा तक पहुँचती है. यानी कि श्रीनगर से लेकर कन्याकुमारी तक और पोरबंदर से लेकर सिलचर तक इस भूभाग के निवासियों की बोलचाल, शिक्षा-दीक्षा, पत्र-पत्रिका और साहित्य की भाषा हिंदी है. इस अर्थ में बिहारी- (भोजपुरी, मगही, मैथिली), राजस्थानी- (मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूँढाडी हाड़ौती,मालवी,आदि), पूर्वी हिंदी-(अवधी ,बघेली, छत्तीसगढ़ी) ,पहाड़ी और प्राचीन डिंगल आदि सभी को हिंदी के ही अंतर्गत माना जाता है, यहाँ बहु संख्याको की भाषा हिंदी है. यह हिंदी का प्रचलित अर्थ है. अब हिंदी आसाम से लेकर अमेरिका तक कोचीन से लेकर चीन तक नोएडा से लेकर इंग्लैंड तक समझी जा रही है. एक भाषा के रूप में हिंदी न सिर्फ भारत की पहचान है, बल्कि यह हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक भी है. बहुत सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा है, जिसे दुनिया भर में समझने, बोलने और चाहने वाले लोग बहुत बड़ी संख्या में मौजूद हैं.यह विश्व में सबसे ज्यादा बोली जानेवाली भाषा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने भारत के हिंदी भाषा के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यह घोषणा 10 जून 2022 शुक्रवार को की गई. जिससे इतिहास के पन्नों में हिंदी का वैश्विक परिदृश्य स्थाई और सुदृढ़ हो गया. अब संयुक्त राष्ट्र के सभी कामकाज और जरूरी संदेश हिंदी में भी पेश किए जाएंगे. भारत ने संयुक्त राष्ट्र के इस फैसले की सहारना की है. इसके अलावा अरबी, चीनी (मैंडरिन), अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश संयुक्त राष्ट्र की छह (6) आधिकारिक भाषाएं पहले से हैं. जिसमें अंग्रेजी और फ्रेंच मुख्य हैं. संयुक राष्ट्रसंघ अर्थात यूएन का मुख्यालय न्यूयॉर्क में है, इसमें 193 सदस्य देश शामिल है. संयुक्त राष्ट्र एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसके उद्देश्य में उल्लेख है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून को सुविधाजनक बनाने के लिए सहयोग, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, मानव अधिकार और विश्व शांति के लिए कार्यरत है. भारत ने हिंदी को बढ़ावा देने के कई प्रयास किए हैं. इसके लिए 2018 में हिंदी @ यूएन' परियोजना शुरू की गई थी. जिसका लक्ष्य हिंदी भाषा में संयुक्त राष्ट्र की सार्वजनिक पहुंच को बढ़ाना और दुनिया भर में हिंदी बोलने वाले लोगों को ज्यादा से ज्यादा धारणाशक्ती देना है. आज हिंदी भारत संघ की प्रमुख राजभाषा है. भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची शामिल अन्य इक्कीस भाषाओं के साथ हिंदी का एक विशेष स्थान हैं. भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं की संख्या 22 है : कश्मीरी, सिन्धी, पंजाबी, हिंदी, उर्दू, बंगाली, आसामी, उडिया, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तेलगु, तमिल, मलयालम, संस्कृत, नेपाली, मढिपूडी, कोंकणी, बोडो, डोंगरी, मैथिली, संताली हैं. यह प्रमुख 22 भाषाएं और लगभग 19,500 से अधिक बोलियां हैं. हिंदी आज दुनिया की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा के रूप में प्रतिष्ठित है. इस समय दुनियाभर में हिंदी बोलने वालों की संख्या ५५ करोड़ से अधिक है वहीं हिंदी समझ सकने वाले लोगों की संख्या १ अरब से भी ज्यादा है. हिंदी,मैंडरिन और अंग्रेजी पर भारी पड़ती है. विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से हिंदी एक है. हिंदी केवल अंग्रेजी से ही नहीं चीन की मैंडरिन से भी आगे है. चीन की मैंडरिन भाषा समूचे चीन में नहीं बोली जाती, चीन में स्थान विशेष की भाषा अलग-अलग है. संख्या के लिहाज से देखा जाए तो दुनियाभर में जितने लोग अंग्रेजी बोलते हैं, उससे कहीं ज्यादा करीब 55 करोड़ लोग अकेले भारत में हिंदी बोलते है. पूरा पाकिस्तान हिंदी बोलता है. बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, तिब्बत, म्यांमार, अफगानिस्तान में भी हजारों लोग हिंदी बोलते और समझते है. यही नहीं, फिजी, गुयाना, सुरिनाम, त्रिनिदाद जैसे देश तो हिंदी भाषिई के ही बसाए हुए हैं. एक तरह से देखें तो हिंदी समाज की जनसंख्या लगभग एक अरब का आंकड़ा छूती है. यदि भारतीय उपमहाद्वीप पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में हिंदी बोलने वालों की संख्या को जोड़ दिया जाए तो हिंदी विश्व को सबसे अधिक बोले जानेवाली प्रथम नंबर की भाषा होगी जो हमारे पारस्परिक ज्ञान, प्राचीन सभ्यता और आधुनिक प्रगति के बीच एक सेतु भी है. हिंदी : हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक है. आधुनिक हिंदी साहित्य के विद्वान भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने कहा था- निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिनु निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल. अँग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन, पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन. हिंदी के महत्व को गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने बड़े सुंदर रूप में प्रस्तुत किया था. उन्होंने कहा था कि भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिंदी महानदी और हिंदी भाषा भारतीय भाषाओं की माला का शुमेरू है. क्योंकि हिंदी पुरखों की संस्कृति के संवर्धन के लिए अर्पण- तर्पण का एक आग्रह भी है. इसलिए हिंदी हमारी आन बान शान है, हिंदी हमारी संस्कृति और सभ्यता का गान हैं. अंतः यह कहना थोड़ा भी अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा कि हिंदी देश की एकता का मंत्र है. साथ ही हिंदी भाषा में रोजगार की अपार संभावनाएँ हैं. हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर सभी भारतीयों को आपके सफल रोजगार और सुनहरे भविष्य की शुभकामनाएँ ! सोर्स:प्रा.डॉ.शेख साबेर शेख कदीर हिंदी विभागाध्यक, नॅशनल कला विज्ञान महाविद्यालय पलसखेड़ा ता.सोयेगाव जिला. औरंगाबाद (महाराष्ट्र)ईमेल: sabersir5@gmail.com (स्वच्छंद-पत्रकार)