प्रौद्योगिकी और उपभोक्ता की स्थिति भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को दिये गये सुझाव के अनुसार बैंकाें काे ग्राहक को जागरूक करने के लिए विभिन्न स्तर, भाषाओं तथा तरीकों से कार्यक्रम आयोजित करना है। तथा इसके लिए एटीएम, स्वयं-सेवा कियोस्क, इंटनेट बैकिंग बेवसाइट, एसएमएस तथा ईमेल का उपयोग करें। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य ग्राहकों के बीच मोबाइल बैकिंग को लोकप्रिय करना तथा उसके पंजीकरण/सक्रियण को बढ़ाना है। इस रिपोर्ट के माध्यम से हम यह समझने का प्रयत्न करेंगे कि कैसे मोबाइल बैकिंग के प्रयोग से ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिल रहा तथा देश में मोबाइल बैकिंग के परिदृश्य को बदल रहा है। प्राथमिक शोध से प्राप्त परिणाम तथा तथ्यों को यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है। गत जनवरी आरबीआई के उपराज्यपाल, एसएस मुद्रा ने अपने भाषण में कहा था कि भले ही मोबाइल बैकिंग और मोबाइल भुगतान स्वीकार करने को लेकर चारों ओर सामान्य उत्साह था, परन्तु कुछ देशों को छोड़कर उसका मॉडल या नमूना अपेक्षाकृत कम सफल था जबकि उसके लिए सही पर्यावरणीय कारक मौजूद थे। भारतीय सन्दर्भ में, उद्देश्यों का विशलेषण इस स्वीकार्यता की धीमी गति के विभिन्न कारणों का खुलासा करेगी। वहाँ कई प्रकार के तकनीकी कारण थे जैसे हैंडसेट के प्रकार, ऑपरेटिंग सिस्टम में विविधता, कूटलेखन की आवश्यकता, अंतर प्रचालित प्लेटफार्म यह इसकी कमी, मानकीकृत संचार संरचनाओं की कमी, एप्लीकेशन के डाउनलोड करने में परेशानी, सक्रिय होने में, देरी आदि है। क्या है यह? पिछले दो दशकों में मोबाइल बैकिंग विकसित हुई है, जहाँ पहले यह सेवा केवल लेन-देन प्रक्रिया के बाद आने वाले सेदेशों तक सिमित थी, वाही अब यह पूरी तरह से बैंक की शाखा सेवा का विकल्प बनकर उभरी है। इसके लिए हमें वायरलेस एप्लीकेशन प्राटोकोल/डब्ल्यूएपी का समर्थन करने वाले स्मार्टफोन का धन्यवाद देना चाहिए। अब ग्राहकों को वे सभी सुविधाएँ मोबाइल पर मिल जाती है, जिनके लिए पहले स्वंय बैंक शाखा जाना जरूरी होता था। तकनीकी रुप से कहे तो जिन बैंक के क्रेडिट/डेबिट लेनदेन से संबधित सभी कार्य जिन्हें मोबाइल उपयोगकर्ताओं को मोबाइल ओपरेटर के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उपभोक्ता को यह सुविधा लेने के लिए अपने बैंक में पंजीकरण करवाना होता है यह स्मार्टफोन पर संबधित एप्लीकेशन को संस्थापित करना होता है। भारतीय रिजर्व बैंक के भुगतान एवं निपटान प्रणाली विभाग द्वारा आवश्यक अनुमति प्राप्त बैंक, जिनके पास कोर बैकिंग समाधान का अनुज्ञापत्र हो, अपने ग्राहकों के मोबाइल बैकिंग सेवा उपलब्ध करा सकते हैन। वर्तमान में केवल रूपये आधारित सेवाओं को ही यह अनुमति प्राप्त है, किसी भी प्रकार के अंतर-सीमा लेनदेन इसके अंतर्गत प्रतिबंधित है। मोबाइल बैकिंग सेवाएं खाता सूचना संक्षिप्त विवरण और खाता इतिहास खाता गतिविधियों के बारे में सर्तक करना साविधि जमाओं की निगरानी कार्ड जानकारी अथवा ऋण खाते की जानकारी बीमा पालिसी प्रबन्धन फंड ट्रांसफर ग्राहक से जुड़े खातों के बीच कोष स्थानान्तरण अन्य खातों के लिए कोष स्थानान्तरण बिल भुगतान क्रेडिट कार्ड का भुगतान निवेश निवेश सूची प्रबन्धन वास्तिवक समय स्टॉक उद्धरण ऋणपत्रों के मूल्य पर व्यक्तिगत सचेतक और सूचनाएं सहयोग सेवाएं चेकपुस्तिका और कार्ड अनुरोध शिकायत दर्ज कराना और उसका मार्गन एटीएम स्थान बच्चों के लिए मोबाइल बैकिंग मई 2014 से आरबीआई ने 10 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए खाता खोलना और उसे स्वतंत्र रूप से संचालित करने की अनुमति दे दी है। इस उम्र के बच्चे – में अपना बचत खाता, सावधि जमा या आर्वर्ती जमा खाता खोल सकते हैं। इन खातों के साथ डेबिट कार्ड और चेकपुस्तिका भी उपलब्ध कराई जाती है। भातीय स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक तो मोबाइल बैंकिंग भी उपलब्ध करा रहे हैं। 99# संशिप्त कोड स्मार्टफोन पर मोबाइल बैकिंग प्रतिबंधित नहीं है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम 99# संशिप्त कोड के माध्यम से एकीकृत राष्ट्रीय यूएसएसडी प्लेटफार्म (एनयूयूपी) सुविधा उपलब्ध कराता है। यह अकेला नबंर बैंक उपभोक्ताओं को बैंक से संबधित सेवाओं को प्राप्त करने की सुविधा देता है- भले ही दूरसंचार सेवा प्रदाता, मोबाइल फोन का निर्माता उज तथा क्षेत्र कोई भी हो। लाभ सभी जीएसएम मोबाइल फोन पर काम करता है। इसे उपयोग करने के लिए मोबाइल फोन पर किसी एप्लीकेशन को संस्थापित करने की आवश्यकता नहीं होती है। इस सेवा में संवादात्मक सेवा सूची भी रहती है। 24 घंटे यह सुविधा उपलब्ध रहती है (छुट्टियों में भी) बैंकिंग सेवाओं में विविधता एवं मूल्य संवर्धित सेवा मिलती है। जीपीआरएस की आवश्यकता नहीं है। आवाज की संयोजकता पर काम करता है। बैंकिंग के लिए अतिरिक्त चैनल एवं वित्तीय समावेशन के प्रसार के लिए विशेष उत्प्रेरक है। रोमिंग के दौरान अतिरिक्त प्रभार नहीं। एनयूयूपी में हिस्सेदार बैंक एनयूयूपी में हिस्सेदार बैंक इलाहाबाद बैंक करूर वैश्य बैंक आन्ध्र बैंक कोटक महिद्रा एक्सिस बैंक ओरिएंटल कोमर्स बैंक ऑफ़ बडौदा पंजाब एंड सिंध बैंक ऑफ़ इंडिया पंजाब नेशनल बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एंड जयपुर केनरा बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ त्रावणकोर सेन्ट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया भारतीय स्टेट बैंक कॉपरेशन बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ मैसूर देना बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ पटियाला एचडीएफसी बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद आईसीआईसीआई बैंक सिंडीकेट’ बैंक आईडीबीआई बैंक यूको बैंक इंडियन बैंक यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया आईएनजी वैश्य बैंक यूनाइटेड बैंक ऑफ़ इंडिया इंडियन ओवरसीज बैंक विजय बैंक एनयूयूपी में दूरसंचार कपनियां एयरसेल क्वाड्रेंट एयरटेल रिलायंस बीएसएनएल टाटा आइडिया युनिनॉर एमटीएनएल वोडाफोन वीडियोकोन उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के नये तरीके प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए बैंकों द्वारा नए-नए प्रकार के मोबाइल बैंकिंग प्लेटफार्म उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पोकेट्स: आईसीआईसीआई बैंक ने पॉकेट नाम से एक डिजिटल पर्स शुरू किया है। यह एक आभासी स्थान है, जहाँ आप अपना पैसा रख सकते हैं और जब भी आवश्कता हो उसे तुरत उपयोग कर सकते हैं। पॉकेट पर्स को कभी भी बनाया जा सकता है और इससे ग्राहक अपनी इच्छानुसार किसी को भी कहीं भी और कभी पैसा भेज सकते हैं तथा प्राप्त भी आकर सकते हैं ई-वाउचर@भौतिक उपहार दें सकते हैं, बिल भुगतान कर सकते हैं, मोबाइल रिचार्ज कर सकते हैं, दोस्तों के साथ खर्चों का भुगतान कर सकते हैं। पर्स एक आभासी कार्ड का उपयोग करता है जो उपभोक्ता को भारत की किसी बेवसाइट या मोबाइल एप्लीकेशन पर लेनदेन की सुविधा देता है। उपयोगकर्ता खुदरा बाजार में भौतिक कार्ड भी उपयोग कर सकता है। चिल्लर- एचडीएफसी बैंक का चिल्लर ऐप ग्राहकों को फोनबुक में दर्ज किसी भी नबंर पर तुरंत और 24 घंटे पैसा भेजने की सुविधा देता है। इसके लिए प्राप्तकर्ता की पास बैंक खाता होना आवश्यक नहीं है। वीडियों बातचीत: इंडसइंड बैंक के ग्राहक वीडियो बातचीत के माध्यम से बैंक के शाखा प्रबंधक, संबधी प्रंबधक अथवा केद्रीयकृत वीडियों शाखा कार्यकारी से पूरी दुनिया से कभी भी संपर्क कर सकते हैं। यह सेवा इंडसइंड बैंक के उन खाताधारकों के लिए, है, जिनके पास एंड्रोय्ड (२.3 अथवा उच्चतर) अथवा एप्पल (ऑपरेटिंग सिस्टम 6.7 उच्चतर) फोन हो। बैंक जिन्होंने बेहतर अंक प्राप्त किये 10 बैंकों के मोबाइल बैंकिंग सेवा की तुलना बेहतर मोबाइल बैंकिंग सेवाओं का पता लगाने के लिए हमने महत्त्वपूर्ण हितधारकों की पहचान की, जिसमें बैंक उसके ग्राहक, साथ ही नियामक संगठन निगम भी शामिल है। उपभोक्ताओं ने सेवाओं में मांग पक्ष का गठन किया और बैकों ने आपूर्ति पक्ष का। प्रथम चरण के रूप में हमने भारत में मोबाइल बैंकिंग के वर्तमान परिद्रश्य को समझने और इसके विकास की अवधारणा को समझने के लिए माध्यमिक साहित्य का गहन विशलेषण किया। इन विशलेषणों के आधार पर हमें उपभोक्ताओं के नजरिए से महत्त्वपूर्ण चरों की एक सूची की पहचान की। अगले चरण में, हमें उन उपभोक्ताओं का विस्तृत साक्षात्कार लिया, जिनके पास दो या दो से अधिक बैंकों में कई खाते हैं। इन साक्षात्कारों की सहायता से हमें 15 बैंकों की सूची बनाने में सहायता मिली, जिनमें से ख्यात बैंकों को हमने मोबाइल बैंकिंग सुविधा के तुलनात्मक अध्ययन के लिए चुना। ये हैं 10 बैंक भारतीय स्टेट बैंक एचडीएफसी बैंक आईसीआईसीआई बैंक केनरा बैंक पंजाब नेशनल बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एंड जयपुर स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद यस बैंक सिटी बैंक ऐक्सिस बैंक हमने मोबाइल बैंकिंग के संबधं में उपभोक्ताओं की संतुष्टि स्तर को सर्वाधिक प्रभावित करने वले ३४ तथ्यों की एक सूची बनाई है। इन तथ्यों को निम्न श्रेणियों के अंतर्गत बांटा गया है मांग पक्ष कारक, आपूर्ति पक्ष कारक और नियामक कारक। इन ३४ तथ्यों में से, सबसे महत्वपूर्ण का चुनाव के अतंगर्त बांटा गया है, जिनमें प्रत्येक को उसकी विशेषता के आधार पर अधिमान दिया गया। तथ्य और अधिमान प्रौद्योगिकी मंच: 16% सक्रियण में आसानी: 38% उपयोग के कार्य: 13% बैंक द्वारा प्रशिक्षण एवं संवर्धन : 31% ग्राहक सेवा: २% इसके बाद बैंकों ने उपभोक्ताओं की प्रतिक्रियाओं के आधार पर प्रत्येक श्रेणी में अंक प्रदान किये और अंतिम परिणाम के लिए उन्हें संबद्ध श्रेणी के अधिमान के साथ गुणा कर दिया। बैंक प्रौद्योगिकी मंच (16%) सक्रियण में आसानी: 38% उपयोग के कार्य: 13% बैंक द्वारा प्रशिक्षण एवं संवर्धन : 31% ग्राहक सेवा: २% 1. कुल प्राप्तांक (10 में से) भारतीय स्टेट बैंक 8 9 9.5 8.5 9 1.28 3.42 1.23 2.64 0.18 8.75 आईसीआईसीआई बैंक 9 9 9.5 9.5 9 1.44 3.42 1.23 2.64 0.18 9.21 सिटी बैंक 8.5 9 9.5 8 9 1.36 3.42 1.23 2.48 0.18 8.67 स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद 7.5 8.5 8 7 8 1.2 3.23 1.04 2.17 0.16 7.8 यस बैंक 9 9 9 8 9 1.44 3.42 1.17 2.48 0.18 8.69 पंजाब नेशनल बैंक 7 7 8.5 7 7.5 1.12 2.66 1.11 2.17 0.15 7.21 एचडीएफसी बैंक 9 9 8.5 9 9.5 1.44 3.42 1.17 2.48 0.16 8.69 स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एंड जयपुर 7 8 8 7 7.5 1.12 3.04 1.04 2.17 0.15 7.52 ऐक्सिस बैंक 8.5 9 8 8 9. 1.36 3.42 1.04 2.48 0.18 8.48 केनरा बैंक 7.5 8.5 8 6.5 7 1.2 3.23 1.04 2.02 0.14 7.63 तालिका को पढ़िए श्रेणियों को कॉलमवार तथा बैंकों को पंक्तिवार सूचीबद्ध किया गया है। हर बैंक के विरुद्ध दो पंक्तियाँ है। प्रथम पंक्ति में संबधित बैंकों से बातचीत के आधार पर 10 अंकों के मापन पर मूल्यांकन किया गया है। दूसरी पंक्ति में अधिमान अंक प्रदर्शित किये गये हैं (उत्पादों और अंकों के आधार पर अधिमान की गणना) अंतिम कॉलम में बैंकों के अधिमान अंकों का कुल जोड़ दिखाया गया है। हालांकि आईसीआईसीआई बैंक इस सूची में शीर्ष पर है। उसके बाद एचडीएफसी बैंक और एसबीआई का स्थान है। इसके बाद विभिन्न बैंकों के मध्य के अंकों में अत्यधिक अंतर नहीं है। अंकों के बीच मामूली से दो अंकों का अंतर है (सबसे अधिक अंक 9.21 आईसीआईसीआई बैंक के हैं और सबसे कम 7.21 अंक पंजाब नेशनल बैंक के) इनके अंक बढ़ रहे हैं मोबाइल बैंकिंग 88.75% की दर से प्रतिवर्ष बढ़ रही है। दिंसबर 2013 में मोबाइल से 88.9 लाख लेनदेन हुए थे जो दिंसबर 2014 में बढ़कर 1.678 करोड़ हो गये । इस लेनदेन का मूल्य दिंसबर 2013 में 22.61 आरबीआई के अनुसार, यदि बैंकवार आंकड़े गिने जाएँ तो भारतीय स्टेट बैंक में सबसे ज्यादा लेनदेन हुए हैं। जबकि एचडीएफसी बैंक मूल्य के संदर्भ में सूची में सबसे ऊपर था। मोबाइल बैकिंग पर आरबीआई के दिशा-निर्देश (आरबीआई के घाेषणानुसार समय अनुसार परिवर्तनीय) भारतीय रिर्जव बैंक द्वारा कंप्यूटर और दूरसंचार में खतरों और नियन्त्रण को लेकर जारी दिशा-निर्देश जारी किया गया, मोबाइल बैंकिंग पर सावधान परिपत्र डीबीएस, सीओ आईटीसी, बीसी, 10/31.09001/97-98, तारीख 4 फरवरी 1998 यथोचित परिवर्तन राहित (आवश्यक परिवर्तन किया गया) लागू होगा। आरबीआई द्वारा समय-समय पर ‘अपने ग्राहकों को जानिए ( केवायसी), कालेधन को वैध बनाने के खिलाफ (एएमेलिया) और आर्थिक आंतकवाद से मुकाबला (सीएफटी) करने के लिए दिशा-निर्दश जारी करता है यह आदेश मोबाइल बैंकिग सेवाओं पर भी लागू होते हैं। बैंक केवल अपने खाता धारक यह क्रेडिट कार्ड ग्रहकों को ही मोबाइल बैकिंग सेवाएँ उपलब्ध करा सकते हैं। हलांकि, नकद बाटने के उद्देश्य से जमा की गई रकम, गैर-खाताधारी से भी प्राप्त हो सकती है। बैंकों के पास दस्तावेजों आधारित पंजीकरण की प्रणाली होना चाहिए, जिसमें उपभोक्ता को मोबाइल बैंकिंग सेवा से पहले भौतिक रूप से उपस्थित होना आवश्यक हो। मोबाइल बैकिंग के दो स्तर हो सकते है। प्रथम स्तर में बेलेंस के बारे में जानकारी धन जमा करने अथवा निकालने पर एसएमएस सतर्कता संदेश, अतिम पांच लेनदेन का विवरण एवं कई अन्य जानकारी आधारित सेवाओं के बारे में जानकारी हो सकती है। नया खाता खोलने के प्रपत्र में स्पष्ट रूप से मोबाइल बैंकिंग विकल्प का उल्लेख होना चाहिए। मोबाइल बैकिंग के दो स्तर में वित्तीय लेनदेन जैसे भुगतान, भुगतान में रोक तथा अंतरण जैसी सेवाओं को शांमिल किया जा सकत अहै। 5000’ रूपये तक के लेनदेन की सुविधा को बैंक शुरू से लेकर अंत तक बिना किसी एनिक्प्शन के दे सकता है। बैंक अपने ग्राहकों को प्रतिदिन की सीमा के बिना भी मोबाइल बैंकिंग तथा लेनदेन की सुविधाएँ सामान/सेवाओं की खरीदी के लिए प्रदान कर सकता है। नकदी न होने की स्थिति में अधिकतम 1000 रुपये मूल्य के अंतकरण का लेनदेन किया जा सकता है। बैंक इस प्रकार के लेनदेन की गति पर प्रति लाभार्थी 25 000 रूपे की सीमा भी तय कर सकता है। बैंकों को उपभोक्ताओं के खातों की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने की जरूरत होती है, चूँकि मोबाइल बैंकिंग के परिदृश्य में बैंकों द्वारा उपर्युक्त दायित्वों को पूरा ना कर पाने का खतरा रहता है। बैंकों को अपनी वेबसाइट पर तथा प्रकाशित सामग्रियों के माध्यम से संभावित खतरों, उत्तरदायित्वों तथा जिम्मेदारियों के बारे में उपभोक्ताओं को आवश्यक रूप से जानकारी देते रहना चाहिए। इस प्रकार की सेवाओं की जिम्मेदारी के लिए किसी अधिकृत एजेंट को रखने से पहले बैकों को उन व्यक्तियों के बारे में यथोचित जानकारी इकट्ठी करनी चाहिए। हालाँकि प्रमुख के तौर पर उनके एजेंटों द्वारा इस प्रकार की चूक या दलाली जैसे गतिविधि के लिए बैंक की जिम्मेदार होगी। उपभोक्ताओं की शिकायतों/नुकसानों की सुनवाई के लिए मौजूद प्रणाली साथ ही साथ बैंकिंग लेनदेन के लिए भी उपयोगी हो सकती है। हालाँकि, वास्तविक रूप से देखा जाए तो तकनीकी अपेक्षाकृत नई है, बैंक को एक सहायता डेस्क बनानी चाहिए और उनकी बेबसाईट पर सहायता डेस्क और शिकायत दर्ज कराने के और उसको उपर स्तर पर ले जाने प्रक्रिया के बारे में उल्लेख करना चाहिए। नाम दर्ज (साइन-अप) कराने के दौरान उपभोक्ताओं को इस प्रकार का विवरण देना चाहिए। बैंक के साथ लेनदेन में विवाद को लेकर उपभोक्ता द्वारा शिकयत दर्ज कराने की स्थिति में सेवा प्रदात्ता बैंक की जिम्मेदारी है कि वह उपभोक्ता की शिकायत को सुने। बैंकों को इस तरह उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए शुल्क वापसी प्रक्रिया बनानी चाहिए। मुआवजा निति सहित शिकायत से निपटने की प्रक्रिया का खुलासा किया जाना चाहिय। मोबाइल बैंक सुविधा को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों/नुकसानों को बैंकिंग लोकापाल योजना में शामिल किया जाएगा। सुरक्षा जानकारी अधिकांश फोन आंकिक पासवर्ड द्वारा ताला लगना स्वीकार करते है। ऐसा ही एक पासवर्ड आप अपने मोबाइल के लिए भी बनाइए, जिसका तोड़ मुशिकल हो। अपना या अपने किसी पारिवारिक सदस्य की जन्मतिथि तथा वर्षगाँठ का दिन घर का कमांक, कार का क्रमांक अथवा दूरभाष क्रमांक को पासवर्ड न बनाएँ (सरकारी अभिलेखों के अनुसार मोबाइल\ तथा इंटरनेट बैकिंग में होने वाले धोखे के लिए कई बार ऐसे लोग भी जिम्मेदार होते हैं, जिन्हें आप जानते है) यदि आपके पास स्मार्टफोन है तो उसमें ऐसे एप्लीकेशन संस्थापित करे जिनसे आपका पासवर्ड सुरक्षित रहे तथा फोन चोरी होने पर आपकी जानकारी किसी के हाथ न लग सके। हलांकि, फोन में सुरक्षित जानकारियां चोर द्वारा कम ही उपयोग की जा पाती है। कभी भी अपनी जानकारियां जैसे, खाता क्रमांक, पासवर्ड या पैन नबर को एसएमएस संदेश में न भेजें । अपने फोन का ब्लूटथ हमेशा बंद रखें तथा किसी भी अनजान स्रोत से डाटा स्वीकार न करें। ऐसा संभव् है कि सार्वजनिक स्थान पर उपलब्ध वाई-फाई के उपयोग से फोन में वायरस आ जाएं। ऐसे संभावित खतरों से बचने के लिए अपने फोन में विश्वनीय एटी –वायरस संस्थापित करें। बैंक से आने वाले खाता शेष राशि के संदेशों को पढ़ने के तुरंत बाद मिटा दें । किसी भी प्रकार की अवांछनीय ईमेल या वेब लिंक को फोन पर न खोलें। कसी भी अविश्वसनीय विकासकर्त्ता द्वारा बनाए गये एप्लीकेशन संस्थापित करने से बचें। अपने फोन को बेचने या फिर फेंकने से पहले उसमें सुरक्षित सभी जानकारियों को साफ करना न भूलें। ऐसी परिस्थिति में फोन की मास्टर सेटिंग या फैक्टरी स्थिति को पुनः लागू कर दें। अपना खाता पासवर्ड क्रम रहित तरीके से बदलते रहें। सभी बैंक खातों के लिए एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल करने से बचें। स्रोत: उपभोक्ता कार्यों के मंत्रालय, भारत सरकार।