कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) का एआई तत्परता के लिए कौशल विकास (एसओएआर) कार्यक्रमएक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य भारत की शैक्षिक व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता दक्षताओं को एकीकृत करना है। यह कार्यक्रम जुलाई 2025 में शुरू किया गया था। एसओएआर का मिशन: भविष्य को सशक्त बनाना एआई जागरूकता को बढ़ावा देना: एसओएआर पहल स्कूली छात्रों और शिक्षकों के बीच एआई साक्षरता को बढ़ावा देने को प्राथमिकता देती है। मशीन लर्निंग (एमएल) की मूल बातें और एआई के नैतिक उपयोग जैसी मूलभूत एआई अवधारणाओं को प्रस्तुत करके, इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा शिक्षार्थियों में जिज्ञासा और आकांक्षा जगाना और उन्हें तकनीक-संचालित भविष्य के लिए तैयार करना है। शिक्षकों के लिए, एसओएआर मौजूदा पाठ्यक्रम में एआई मॉड्यूल को शामिल करने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिससे प्रभावी सेवा अदायगी और उद्योग की आवश्यकताओं के साथ समन्वय सुनिश्चित होता है। आर्थिक आत्मनिर्भरता का समर्थन: एसओएआर युवाओं को आईटी, डिजिटल नवाचार और एआई -संचालित उद्योगों जैसे उच्च-मांग वाले क्षेत्रों के लिए कौशल से लैस करके भारत के आर्थिक आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) विज़न का रणनीतिक रूप से समर्थन करता है। यह पहल पीएमकेवीवाई 4.0 जैसी प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है, जो रोज़गार क्षमता और उद्यमिता को बढ़ाने के लिए उभरती तकनीकों के कौशल विकास पर केंद्रित है। तकनीक-संचालित भारत का निर्माण: एसओएआर का दीर्घकालिक दृष्टिकोण भारत को एआई के क्षेत्र में एक वैश्विक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करना है और इसके लिए युवाओं को एआई -संचालित करियर और उद्यमशीलता के लिए तैयार करना है। एआई -साक्षर छात्रों और शिक्षकों के एक मज़बूत इकोसिस्टम को बढ़ावा देकर, इस पहल का उद्देश्य एआई विकास, डेटा विश्लेषण और तकनीकी नवाचार में विभिन्न भूमिकाओं के लिए कुशल पेशेवरों का एक समूह तैयार करना है। मुख्य बातें एआई तत्परता के लिए कौशल विकास (एसओएआर) का लक्ष्य कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के स्कूली छात्रों और शिक्षकों को एआई में सक्षम बनाना है, ताकि इस तेज़ी से डिजिटल होती दुनिया में भविष्य के लिए तैयार भारत का निर्माण हो सके। एसओएआर में छात्रों के लिए 15 घंटे के तीन लक्षित मॉड्यूल और शिक्षकों के लिए 45 घंटे का एक स्वतंत्र मॉड्यूल शामिल है, जिनमें एआई के नैतिक उपयोग और मशीन लर्निंग की मौलिक अवधारणा जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एसओएआर: प्रासंगिकता और अपेक्षित परिणाम स्किल इंडिया मिशन के साथ रणनीतिक समन्वय: एसओएआर छात्रों के लिए लक्षित मॉड्यूल प्रदान करके स्किल इंडिया मिशन का समर्थन करता है, ताकि युवाओं को एआई-संचालित क्षेत्रों में रोज़गार क्षमता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आवश्यक डिजिटल कौशल प्रदान किया जा सके। विकसित भारत विज़न में योगदान: यह कार्यक्रम "सभी के लिए एआई" पहल के माध्यम से 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र विज़न को आगे बढ़ाता है। यह एक तकनीक-कुशल कार्यबल को बढ़ावा देता है जो नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए एआई का लाभ उठाता है, जैसा कि राष्ट्रीय कौशल विकास रणनीतियों में बल दिया गया है। डिजिटल समावेश को बढ़ावा: एसओएआर, स्किल इंडिया डिजिटल हब जैसे सुलभ प्लेटफ़ॉर्म में एआई प्रशिक्षण को एकीकृत करके शहरी-ग्रामीण डिजिटल विभाजन को कम करता है। यह सरकारी और निजी स्कूलों में डिजिटल कौशल तक समान पहुँच सुनिश्चित करता है, जिससे वंचित समुदाय सशक्त बनते हैं। एआई-जागरूक छात्र और प्रशिक्षित शिक्षक: एसओएआर का उद्देश्य एआई-जागरूक छात्रों को तैयार करना है, जो नैतिक एआई अनुप्रयोग में सक्षम हों और सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षकों को शिक्षण पद्धतियों को बेहतर बनाने और कक्षाओं में एआई को व्यापक रूप से अपनाने को सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित करें। एआई करियर में रुचि बढ़ाना और कौशल अंतराल कम करना: एसओएआर कार्यक्रम का उद्देश्य व्यावहारिक कौशल के माध्यम से एआई करियर में युवाओं की रुचि बढ़ाना है। यह समावेशी प्रशिक्षण प्रदान करके और उच्च-मांग वाले तकनीकी कौशल तक पहुँच को सक्षम बनाकर डिजिटल दक्षताओं में शहरी-ग्रामीण अंतर को भी कम करता है। PIB