<div id="MiddleColumn_internal"> <h3>भूमिका</h3> <p style="text-align: justify; ">यह अध्याय किशोर न्याय व्यवस्था के तहत बाल सुरक्षा में शामिल विभिन्न समितियों संस्थाओं संगठनों और व्यक्तियों की भूमिका और जिम्मेदारियों के बारे में चर्चा करता है।</p> <p style="text-align: justify; ">सभी किशोर न्याय कार्याधिकारियों और सहयोगी व्यवस्थाओं के बीच सहयोग और सहभागिता में एक अंतर अनुशासनात्मक समझ और किशोर न्याय व्यवस्था में हस्तक्षेपों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।</p> <p style="text-align: justify; ">हर के की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका और जबावदेहियाँ है और इन सभी इन सभी को बच्चे का परमहित और बाल सुलभ वातावरण के एकमात्र लक्ष्य के लिए कार्य करने की आवश्यकता है।</p> <p style="text-align: justify; ">बाल कल्याण समिति या किशोर न्याय बोर्ड</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>बा. क. स. –देखभाल एवं सुरक्षा के जरूरतमंद बच्चे </li> <li>कि. न्या. बो. – कानून का उल्लंघन करनेवाले किशोर </li> </ul> <p style="text-align: justify; ">जिम्मेदारियां</p> <p style="text-align: justify; ">देखभाल एवं सुरक्षा के जरूरतमंद बच्चों व कानून का उल्लंघन करनेवाले किशोरों की देखभाल, सुरक्षा उनका पुनर्वास और विकास</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>निगरानी अधिकारी/बाल कल्याण अधिकारी/सामाजिक कार्यकर्त्ता </span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">जिम्मेदारियां</p> <p style="text-align: justify; ">बा. क. स. और कि. न्या. बो. निम्नलिखित मदद करना :</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>दाखिला के वक्त मदद </li> <li>इतिहास जानना </li> <li>पूछताछ करना</li> <li>रपट तैयार करना </li> <li>गृहों में जाना </li> <li>व्यक्ति व समूह को शिक्षा देना </li> </ul> <h3 style="text-align: justify; "><span>संस्थागत कार्याधिकारी (सुपरिटेंडेंट, बच्चों की देखभाल करनेवाले, गृह अभिभावक) </span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">शामिल विभाग व्यक्ति</p> <p style="text-align: justify; ">सुपरिटेंडेंट, बच्चों की देखभाल करनेवाले, गृह अभिभावक</p> <p style="text-align: justify; ">जिम्मेदारियां</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>आवासीय संस्थाओं में दाखिल बच्चों की बच्चों की देखभाल सुरक्षा एवं पुनर्वास मुहैया कराना </li> <li>ये लोग 24 घंटें बच्चों के साथ रहते है और इसलिए इनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। इन्हें संस्थाओं में ऐसा वातावरण बनाना है जो कि “बाल केन्द्रित” व “बाल सुलभ” हो और साथ ही बच्चों के साथ संवेदनशील और ध्यान रखने वाला रवैया रखना है।</li> <li>कठोर, नकारात्मक व दण्डात्मक रवैया बच्चे के विकास और पुनर्वास के लिए नुकसानदेह होता है। इसके बाद ही संस्था के अंदर अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखना एक चुनौती है।</li> </ul> <p style="text-align: justify; ">यह सुनिश्चित करना है कि सेमीनार, कार्यशालाएं एंव संवेदित करनेवाले प्रशिक्षणों की लगातार आवश्यकता है क्योंकि कर्मचारियों की सोच को बदलने के लिए यह महत्वपूर्ण अवयव है।</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>शिक्षक एवं पेशा आधारित प्रशिक्षक </span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">जिम्मेदारियां</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>शिक्षा प्रदान करना-औपचारिक या अनौपचारिक</li> <li>विभिन्न पेशा आधारित पाठ्यक्रम पर प्रशिक्षण देना ताकि संस्था के बाहर जाने के बाद आत्मनिर्भर हो सके। </li> <li>“जीवन शैली व पेशा आधारित योग्यताएँ सिखाना </li> </ul> <h3 style="text-align: justify; ">पुलिस व्यवस्था</h3> <p style="text-align: justify; ">किशोर न्याय व्यवस्था के “गैर-अपराधिकरण” की लगातार कोशिशें बच्चों को वयस्कों के द्वारा बनाई हुई सामाजिक व्यवस्था का “शिकार’ मानने के बावजूद-पुलिस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।</p> <p style="text-align: justify; ">शामिल विभाग व व्यक्ति</p> <p style="text-align: justify; ">शहर की पुलिस, रेलवे पुलिस, विशेष किशोर पुलिस विभाग, नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारी</p> <p style="text-align: justify; ">जिम्मेदारियां</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>बाल कल्याण समितियों और न्याय बोर्ड को विभिन्न स्तरों पर मदद करना </li> <li>बच्चो को बा. क. स./ कि. न्या. बो. के सामने प्रस्तुत करना इनकी भूमिका में शामिल है।</li> <li>मामले पर रपट देना</li> <li>पूछताछ करना।</li> <li>बच्चों के घर ढूंढना और उनकी घर भेजना। चिकित्सकीय जाँच व उम्र की जाँच के लिए अस्पताल ले जाना </li> <li>सबूतों को रिकोर्ड करना व मामलों में अंतिम व सुझाव देना</li> <li>एक बार फिर लगातार प्रशिक्षणों से बाल सुलभ पुलिस व्यवस्था को सुनिश्चित करने की जरूरत है।</li> </ul> <h3 style="text-align: justify; "><span>स्वास्थ्य विभाग </span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">शामिल व्यवस्था/व्यक्ति</p> <p style="text-align: justify; ">सरकार, नगर निगम व पुलिस अस्पताल, फोरेंसिक विशेषज्ञ, चिकित्सा एवं मनोचिकित्सक</p> <p style="text-align: justify; ">जिम्मेदारियां</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>आवासीय संस्थाओं में रहने वाले बच्चों को नियमित चिकित्सकीय जाँच व देखभाल करवाना </li> <li>उम्र की जाँच </li> <li>बलात्कार व यौन उत्पीड़न के मामलों में स्त्री रोग जाँच व फोरेंसिक जाँच </li> <li>दुघर्टनाओं और शारीरिक चोटों के मामले में चिकित्सकीय इलाज </li> <li>भावनात्मक आघात/सदमा, मनोवैज्ञानिक समस्या के लिए मनोचिकित्सकीय इलाज </li> <li>मानसिक रोगों से ग्रस्त बच्चों के लिए लम्बी अवधि के इलाज </li> </ul> <h3 style="text-align: justify; ">कानूनी व्यवस्था</h3> <p style="text-align: justify; ">बा.क. स. और कि. न्या. बो. बृहत कानून व्यवस्था का हिस्सा हैं और बाल उत्पीड़न के मामलों में अक्सर उच्चतर अदालतों की सहायता की जरूरत पड़ती है।</p> <p style="text-align: justify; ">शामिल विभाग/व्यक्ति न्यायाधीश, वकील</p> <p style="text-align: justify; ">जिम्मेदारियां</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>वकीलों को अदालतों की जरूरत अनुसार नियुक्त किया जा सकता है।</li> <li>पीड़ितों को क़ानूनी सहायता </li> <li>बा. क. स. को जटिल मामलों में क़ानूनी मार्गदर्शन देना </li> <li>मौजूदा कानूनों में संशोधनों के सुझाव देना व उनकों असरदार ढंग से लागू करवाना </li> </ul> <h3 style="text-align: justify; ">राज्य सरकार मशीनरी</h3> <p style="text-align: justify; ">शामिल विभाग/व्यक्ति</p> <p style="text-align: justify; ">राज्य सरकार के मशीनरी में निम्नलिखित शामिल है।</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>राज्य सरकारें या नीतियों के स्तर पर </li> <li>महिला एवं बाल विकास-नीतियों के स्तर पर </li> <li>निर्देशालय, जिला कर्मचारी एवं परवीक्षा आधिकारी-जमीनी स्तर पर </li> </ul> <p style="text-align: justify; ">जिम्मेदारियां</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>किशोर न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी मुद्दे </li> <li>व्यापक से लेकर छोटे स्तर पर हस्तक्षेप </li> <li>नेटवर्किंग</li> <li>नीतियों का विकास </li> <li>कानूनों का क्रियान्वयन </li> </ul> <h3 style="text-align: justify; ">केन्द्रीय सरकार व सम्बन्धित मंत्रालय</h3> <p style="text-align: justify; ">शामिल विभाग/व्यक्ति</p> <p style="text-align: justify; ">महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, श्रम मंत्रालय, सामाजिक, सामाजिक न्याय व सशक्तिकरण मंत्रालय एवं कानून मंत्रालय</p> <p style="text-align: justify; ">जिम्मेदारियां</p> <p style="text-align: justify; ">व्यापक स्तर के हस्तक्षेप जैसे</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>बच्चों के लिए बाल सुरक्षा नीतियाँ </li> <li>राष्ट्रीय कार्य योजना </li> <li>राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा आयोग </li> <li>विभिन्न बाल सुरक्षा एवं कानूनों को लागू करवाना </li> <li>बाल सुरक्षा पर राष्ट्रीय योजनाएँ</li> </ul> <h3 style="text-align: justify; ">मीडिया</h3> <p style="text-align: justify; ">शामिल विभाग/व्यक्ति</p> <p style="text-align: justify; ">अखबार व दृश्य माध्यम</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>बाल अधिकारों की सुरक्षा व प्रचार की दिशा में कार्य करना।</li> </ul> <p style="text-align: justify; ">मीडिया की सबसे बड़ी जिमेदारी है की वह :संवेदनशीलता” पैदा करे ना कि “ सनसनी”</p> <h3 style="text-align: justify; ">नागरिक समाज</h3> <p style="text-align: justify; ">बच्चों के अधिकारों व सुरक्षा के लिए पूरे नागरिक समाज एक एकजुट होना जरुरी है। जब समाज संवेदित होगा और बच्चों के मुद्दों के बारे में जागरूक होगा और उन्हें देश के भविष्य की तरह देखेगा सिर्फ तभी बाल अधिकार के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान होगा।</p> <p style="text-align: justify; ">शामिल विभाग/व्यक्ति- सामाजिक संगठन स्वंयसेवक एवं जिम्मेदार नागरिक</p> <p style="text-align: justify; ">जिम्मेदारियां</p> <ul style="text-align: justify; "> <li>बाल अधिकारों के प्रति जागरूक होना </li> <li>अपनी सीमाओं घर या नया स्थापत्य के भीतर बाल उत्पीड़न को रोकना।</li> <li>घायल बच्चों को अस्पताल ले जाना </li> <li>मुसीबत में फंसे बच्चे तक या तो पुलिस या फिर चाईल्डलाईन 1098 को खबर देकर मदद पहुँचाना।</li> </ul> <p style="text-align: justify; ">बच्चे के परमहित के लिए सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं की सहभागिता बहुत महत्वपूर्ण है। सहभागिता व सहप्रबंधन के विचार में कार्य का बंटवारा शामिल है, जब कि प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार की है, पर गैर सरकारी संगठनों द्वारा सहयोग प्राप्त और प्रदान किया जा सकता है।</p> <p style="text-align: justify; "><strong> स्त्रोत: चाईल्डलाईन इंडिया फाउंडेशन</strong></p> </div>