परिचय असंस्थागत सेवाएं संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन यू.एन.सी. आर सी के अनुच्छेद 20 व 21 पर आधारित है। और ये सच है कि प्रत्येक बच्चे का सर्वोच्च हित उसके पोषक पारिवारिक माहौल में प्राप्त होता है और ये सभी बच्चे का बुनियादी अधिकार है कि वे परिवार में पले बढ़े। औचित्य अच्छी से अच्छी संस्थाएं भी पारिवारिक महौल में होने वाली बच्चों की देखरेख का विकल्प नहीं बन सकती। बेहद बड़े और अव्यक्तिगत देखभाल की संस्थाओं में मिले नकारात्मक व दर्दनाक अनुभव गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याओं की वजह बन सकते हैं। एक संस्था में बच्चों की देखरेख का खर्च उसमें मिल रही सुविधाओं से बहुत ज्यादा है इसलिए यह बेहतर होगा कि असंस्थागत परिवार आधारित सामुदायिक सेवाओं के द्वारा संकट में फंसे परिवारों की मदद हो सके ताकि बच्चे अपने परिवारों के भीतर पल बढ़ सके। असंस्थागत सेवाओं के उद्देश्य बच्चे के परिवार के अधिकार को सुनिश्चित करना। परिवार को एक इकाई के रूप में मजबूत करना व परिवारों के बिखराव पर अंकुश लगना। रोकथामपूर्ण, सहयोगी, समुदाय आधारित, परिवार आधारित पंहुच विकसित करना। परित्याग व सामाजिक आर्थिक हालात के कारण बच्चों के संस्थागत को रोकने के लिए संकट एन फंसे परिवारों को जरुरी शिक्षा मुहैया विशेष परिस्थितियों में जब बच्चे का वास्तविक परिवार उसकी देखभाल नहीं कर सकता तब वैकल्पिक पारिवारिक देखरेख की व्यवस्था करना। बच्चों के असंस्थाकरण के प्रति कार्य करना और उसे उसके अपने जैविक परिवार या वैकल्पिक परिवार या वैकल्पिक गोद लेने वाले या देखभाल करनेवाले परिवारों में उसे पुनर्स्थापितकरना। स्थानीय समुदायों के भीतर संसाधनों कको एकत्रित करना ताकि लोगों की सहभागिता के बढ़ावा देते हुए उनकी स्वाभाविक क्षमताओं को विकसित किया जा सके। गैर संस्थागत सेवाओं का अवलोकन दत्तक ग्रहण यह अनाथ, परित्यक्त/बेसहारा बच्चों के लिए सबसे अच्छी गैर संस्थागत सेवा समझी जाती है। यह उन्हें एक स्थिर योजना और पारिवारिक माहौल में वैकल्पिक देखरेख प्रदान करता हो। जब जन्म के माता-पिता किन्हीं मजूबर परिस्थितयों के कारण बच्चे को हमेशा के लिए त्याग देते है, तब एक दत्तक ग्रहणकर्त्ता परिवार एक बच्चे जिसके अभिभावक नहीं हैं, के देखरेख का सबसे अच्छा विकल्प है। दत्तक ग्रहण के पूर्व, परिवारों में यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है की बच्चे को नये घर में शारीरिक, मानसिक और आर्थिक सुरक्षा मिले। दत्तक ग्रहण के पूर्व काउंसलिंग से विवाहित जोड़े (पति-पत्नी) अभिभावकीय भूमिका के लिए भावनात्मक रूप से तैयार होते हैं। एक बेसहारा बच्चे के पुनर्वास में सर्वप्रथम देश के अंदर दत्तक ग्रहण को प्राथमिकता देनी चाहिए। हेग कन्वेशन के आधार पर और एक बच्चा अपने सामाजिक-सांस्कृतिक माहौल में सबसे अच्छे ढंग से समायोजित होता है, देश के भीतर पुनर्स्थापन सबसे पहला विकल्प है उसके बाद ही बच्चों के लिए अन्तर्राष्ट्रीय पर विचार किया जाता है। सभी अनाथ व दरिद्र बच्चों के तत्काल समीक्षा उन्हें हमेशा के लिए अधिग्रहण के दारा न्याय कानून के तहत अधिग्रहण के लिए स्वतंत्र घोषित किया जा सके और वे संस्थाओं में अनिश्चिता काल एक लिए दयनीय स्थिति में नहीं रहे। बड़े बच्चों के अधिग्रहण का विचार करने से पहले उनके लिये बहुत विशेष शिक्षा सेवाओं की जरूरत होती है। घरनुमा देखरेख यह उन बच्चों को कुछ समय के लिए वैकल्पिक देखभाल प्रदान करता है जिनके माँ बाप बिमारी, मृत्यु, अभिभावक की कमी या और किसी भी दूसरी परिस्थतियों में बच्चे की देखभाल करने में असर्मथ है। बच्चे को एक दूसरे सबंधित गैर संबधित परिवार में देखभाल के लिए कुछ या उससे विस्तृत समय के लिए रखा जाता है। जैविक अभिभावक नियमित रूप से उन्हें देखने आते हैं और पुनर्स्थापन के बाद बच्चा/बच्ची अपने घर वापस जा सकते हैं। तात्कालिक अभिभावक के लिए उद्देश्य के प्रति सही होने, योग्यता और उद्देश्य के मूल्यांकन महत्वपूर्ण है। साथ ही साथ उनके जन्मजात कुल संस्कार, सामाजिक सांस्कृतिक, आर्थिक पृष्टभूमि के साथ अनुकूलन का मूल्याकंन भी जरुरी है ताकि बच्चों के स्वाभाविक घर से तात्कालिक घर में शामिल होने और इस संक्रमण को सुनिश्चित किया जा सके और भावनात्मक त्राण को कम किया जा सके। घरनुमा देखरेख योजना के बच्चे की देखभाल के लिए तात्कालिक परिवार को अवश्य आर्थिक मदद देनी चाहिए, साथ ही साथ बच्चे के स्वाभाविक अभिभावक को भी पुनर्स्थापन हेतु मदद ताकि वे बच्चे को जब संभव हो वापस ले जा सके। या अकेली, बिनब्याही माँ के लिए बच्चे के परित्याग को रोकने की भी सेवा हो सकती है, जो अपने बच्चे को सदा के लिए बच्चे के अधिग्रहण के लिए नहीं छोड़ना चाहती बल्कि उसे एक तात्कालिक अवधि के लिए मदद की आवश्यकता होती है। बिरादपुर घरनुमा और समूह घर कुछ ऐसी सेवाएँ है जिन्हें भी विकसित और मजबूत किये जाने की जरूरत है। प्रायोजकता फिलहाल बच्चों की चिकित्सकीय, पोषकीय और शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने और उनके सामान्य जीवन स्तर सुधारने में परिवारों को आर्थीक सहयोग मुहैया कराने के सबसे प्रभावशाली कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। बच्चे/बच्चियां अपने जन्म गृह परिवार से अलग नहीं है और वे पारिवारिक माहौल की सुरक्षा से लाभान्वित है जो एक स्वस्थ और बढ़ने के लिए आवश्यक है। परिवार के आत्मनिर्भर/स्वतंत्र बनाने के लिए एक इकाई के रूप में उसका सशक्तिकरण करना प्रयोजन की एक प्रभावकारी पहल है। इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन के बहुत सारे मानक है जैसे व्यक्ति से व्यक्ति को प्रायोजकता, समूह प्रायोजकता या सामुदायिक प्रायोजकता प्रायोजकता प्रायः एक रोकथाम करने वाली सेवा भी है जो बच्चे की देखरेख और शिक्षा के उद्देश्य के लिए उनके संस्थाकरण को रोकता है। सामुदायिक केंद्र बच्चे की असुरक्षा और लगातार दरिद्रता समाज के वंचित और सुविधाधीन तबके में बहुत ज्यादा है। समुदाय आधारित पहुँच सेवाएं जैसे शिक्षा केंद्र बच्चे की निगरानी क्लिनिक, किशोर निगरानी ब्यूरो, परिवार सेवा केंद्र और पुनर्रचना केंद्र को स्थपित करना चाहिए ताकि समुदायों का इन सहयोगों तक आसानी से पंहुच हो। ये बहुउद्देश्यीय शिक्षा केंद्र किशोर अपराध और पारिवारिक मतभेद रोकने में ये काफी समर्थ है तथा बच्चों के लिए लाभदायक है। दैनिक देखरेख/रात्रि देखरेख शरणस्थल जब कामकाजी माता या एकल अभिभावक अपने कार्य स्थल पर होते हैं तब पालन पोषण (forster care) से सम्बन्धित इस सेवा में बच्चे एक वैकल्पिक परिवार में दिन या रात्रि में रहते हैं। समूहों में बच्चों की देखरेख भी की जा सकती है, दैनिक देखरेख केंद्र या रात्रिकालीन आश्रय के माध्यम से। यह सेवा संकटग्रस्त परिवारों को साथ रखने में मदद करती है जो अपने बच्चे के पूर्ण कालीन पालन पोषण या संस्थागत देखरेख में रखने की सोचते है। गैर सरकारी संगठन पड़ोस में ही ऐसे परिवारों को ढूंढने में मदद कर सकते हैं जो दैनिक देखरेख की सुविधा और इनके बीच समन्वय मुहैया कराने की इच्छा रखते हैं। पारिवारिक सहयोग यह सेवा ‘संकट ग्रस्त” परिवारों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है जिनके तात्कालिक संकट स्थिति जैसे बेरोजगारिया, गंभीर बीमारी जो पारिवारिक टूट को बढ़ावा दे सकता है से उबरने की मदद करता है। यह लक्ष्य परिवार को स्वयं सेवी समूहों के द्वारा स्वरोजगार के अवसर के प्रदान करने आय उत्पादक योजनाओं को प्रदान करने के द्वारा स्वाबलंबी बनाने के प्रति कार्य करने के लिए है ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाएँ (जैसे सब्जी ठेलेवाले,दर्जी, चमड़े का कार्य और छोटे घर आधारित व्यवसाय) इस प्रकार एक परिवार को यह अपने क्रियाकलापों को सुधार करने आर्थिक दबावों के कारण पाविवारिक बिखरावों को रोकने में सहयोग करता है। विद्यालय सामजिक कार्य विद्यालय शिक्षावेत्ता या सरकारी सामाजिक कार्यकर्ता और निगम विद्यालय, विद्यालय छोड़ने से रोकने, बर्बा दी और सड़न के स्तर को कम करने, बच्चों को निर्देश प्रदान करने और पारिवारिक शिक्षा व अन्य सहयोगी सेवाओं में बहुत प्रभावकारी होते हैं। सामाजिक कार्यकर्त्ता विद्यालय की शैक्षणिक लाभ, पोषकीय व स्वास्थ्य लाभ के लिए एक केंद्र के रूप में प्रोत्साहित करंता है और शिक्षा को लेकर सहयोगी सेवाओं को सामने लाता है। विद्यालय सामाजिक कार्य सेवाएं शिक्षा को सामाजिक वास्तविकताओं के प्रति अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए, शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए और बच्चों के लिए शैक्षणिक अवसर उपलब्ध करने लिए अत्यंत आवश्यक है। प्राथमिक विद्यालय बच्चों और उनके परिवारों के लिए असंस्थागत सेवाएँ प्रदान करने हेतु शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में एक अच्छा आधार है। काउंसिलिंग काउंसिलिंग सभी असंस्थागत सेवाओं का सबसे अभिन्न, अप्रयत्क्ष अवयव है। आवश्यक भावनात्मक सहयोग को प्रदान करने के द्वारा संकट में फंसे परिवारों को अपनी क्षमता एकत्रित करने में सहायता मिलती है, ताकि वे संकटपूर्ण स्थितियों से निपटें और बच्चे के संस्थाकरण को समस्या के समाधान का रास्ता न बनाएं। शिक्षण उन्हें पुनार्विश्वास की एक चेतना देता है। जब निपटने का उपाय असफल हो जाता है, प्रभावकारी ढंग से क्रियाकलाप करने में तब पेशेवर हस्तक्षेप संकट से उबरने में उनकी मदद करता है। हालंकि भविष्य में अधिक समुदाय आधारित असंस्थागत सेवाओं से जुड़े कार्यक्रमों पर जोर दिया जाना चाहिए। लघु अवधि संस्थागत देखरेख को एक अंतरिम काल के भीतर जब दूसरे विकल्पों को ढूंढा जा रहा हो, एक विकल्प के तौर पर समझा जा सकता है। हम संस्थाओं के बिना नहीं चल सकते क्योंकि कुछ बच्चों के लिए यह एकमात्र विकल्प होता है, लेकिन इन दोनों तरह की समझ को जो संस्थागत व असंस्थागत है, इन्हे एक दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाना चाहिय साथ, ही साथ बाल देखभाल की संस्थाओं की गुणवत्ता को सुधारने के प्रयास करने होंगे और माता-पिता के साथ छोटे व्यक्तिगत समूह, घरों में कुटीर व्यवस्था को विकसित किया जाना चाहिए ताकि एक पोषक पारिवारिक ढंग के माहौल की रचना की जा सके। निष्कर्ष कल्याण से विकास, जरूरतों से अधिकार, और संस्थागत देखभाल से असंस्थागत देखभाल के बदले हुए रूप संकट में फंसे परिवारों और बच्चों की सुरक्षा और देखभाल की जरूरत के लिए हो रहे हस्तक्षेपों में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। परित्यक्त और दरिद्र बच्चों का संस्थागत देखभाल के द्वारा पुनर्स्थापना ही अब तक का कार्य व्यवहार रहा है। भविष्य में बच्चों की आवासीय संस्थाओं की गुणवत्ता में सुधार पर जोर होना चाहिए। बच्चों को सहभागिता और इसके साथ-साथ समुदाय प्रदान और परिवार आधारित विकल्पों को विकसित किया जाना चाहिए। यह महत्वपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन महज एक अच्छी भावना की घोषणा से बाल अधिकार को सुनिश्चित करनेवाले प्रभावकारी औजार के रूप में परिवर्तित हुआ है। गैर संस्थागत सेवाएं दत्तक ग्रहण काउंसलिंग घरनुमा देखरेख पालन-पोषण विद्यालय सामाजिक कार्य प्रायोजकता सामुदायिक केंद्र दैनिक देखरेख रात्रि देखरेख आश्रय प्रत्येक बच्चें के परिवार के अधिकार को सुनिश्चित करना। स्त्रोत: चाईल्डलाईन इंडिया फाउंडेशन