भारत में बच्चों के खिलाफ अपराध बच्चों के खिलाफ यौन अपराध बहुत ज्यादा हैं पर बहुत कम संख्या ही रिपोर्ट होती है। एक अध्ययन के अनुसार कुल सर्वे किए गए बच्चों में से 53 प्रतिशत बच्चों ने स्वीकार किया कि उन्होने अपने जीवन में एक या किसी न किसी प्रकार के यौन अपराधों को अनुभव किया है। सर्वाधिक मामलों में अपराधी कोई परिवार का सदस्य, नजदीकी रिश्तेदार या जान पहचान का होता है। ऐसे हालातों में बाल पीड़ित अपने साथ हुई दुर्व्यहार को बताता नहीं है। यौन दुर्व्यहार बच्चे के मानस को पूरे जीवन भर डराता रहता है। एक बच्चा जिसके साथ यौन दुर्व्यवहार किया जाता है, इस तरह के संज्ञानात्मक हानि, अवसाद और चिंता सहित हिंसक व्यवहार के रूप में बहुत ही गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ता है। शर्म और ग्लानि महसूस करना तथा कमजोर पारस्परिक संबंध और आत्म सम्मान मे कमी यौन दुर्व्यवहार से पीड़ित बच्चों के अन्य परिणाम हैं। बच्चों के लिए पोक्सो ई-बटन-एक शुरुआत यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण, (POCSO) ई-बॉक्स, बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों को दर्ज करने के लिए एक प्रत्यक्ष एवं आसान ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली के रुप में शुरु की गई है। इससे यौन अपराधियों के खिलाफ पोक्सो अधिनियम, 2012 के तहत समय पर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा सकेगी।ह ई-बॉक्स इस शिकायत प्रणाली को पूरे देश में वृहद पैमाने पर लागू करने में मदद करेगा। ई-बॉक्स का प्रयोग बहुत ही आसान है और इससे शिकायतकर्ता की गोपनीयता को बनाया रखा जा सकेगा। कार्यप्रणाली इस ई-बॉक्स को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की वेबसाईट के मुख पृष्ठ पर प्रमुख रूप से स्थापित किया गया है जहां प्रयोगकर्ता को सामान्य रूप से पोक्सो ई-बॉक्स का बटन दबाना होता है। पहला चरण-1 यह आपको एक नए पेज पर ले जाता है जहां एक एनीमेटेड फिल्म दिखाई जाती है। यह फिल्म पीड़ित बच्चे को आश्वासन देती है कि उसके साथ जो कुछ हुआ है उसमें उसकी कोई गलती नहीं है और उसे अपराधबोध करने की कोई जरूरत नहीं है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग उसका मित्र है और उसकी मदद करने को तैयार है। दूसरा चरण-2 इस पृष्ठ पर स्थित एक तीर को दबाने के बाद यह एक नए पृष्ठ पर ले जाता है जहां पीड़ित बच्चे को तस्वीरों के विकल्पों मे से कम से कम एक तस्वीर को चुनना होता है। ये तस्वीरें उत्पीड़न की श्रेणी को बताती हैं। इसके बाद एक फॉर्म भरना होता है जिसमें ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर और उत्पीड़न के विवरण के बाद सबमिट बटन दबाना होता है। इस तरह शिकायत दर्ज हो जाती है और एक स्वतः उत्पन्न शिकायत नंबर दिखाई देने लगता है। पोक्सो अधिनियम बच्चों के खिलाफ इस तरह के अपराधों के बारे में चिंतित होने के कारण सरकार ने पोक्सो अधिनियम 2012, अधिनियमित किया ताकि बच्चों को यौन प्रताड़ना, यौन उत्पीड़न और अश्लील साहित्य के अपराधों से बचाया जा सके। साथ ही विशेष अदालतों के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया के हर चरण, यानी रिपोर्टिंग, तथ्यों की रिकार्डिंग, जांच और त्वरित सुनवाई में बच्चे के अनुकूल तंत्र को शामिल करके, बच्चे के हित की रक्षा की जा सके। 18 साल तक की उम्र का कोई भी मानव पोक्सो अधिनियम के तहत एक बच्चे के रूप में मान्यता प्राप्त है। स्त्रोत : पीआईबी। बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम 2012 क्या है? देखें पोक्सो कानून पर एक फ़िल्म