धातू गण पद त्वान्त ल्यबन्त तुमन्त आ + तन् (८ उ.प.) .. आतत्य आतनितुम् आ + दा (३ आ.प.) .. आदाय आदातुम् आ + दिश् (६ उ.प.) .. आदिश्य आदेष्टुम् आ + दृ (६ आ.प.) .. आदृत्य आदर्तुम् आ + धा (३ उ.प.) .. आधाय आधातुम् आ + नी-नय् (१ उ.प.) .. अपनीय नेतुम् आ + पद् (४ आ.प.) .. आपद्य आपत्तुम् आ + प्रच्छ्-पृच्छ् (६ आ.प.) पृष्ट्वा आपृच्छ्य आप्रष्टुम् आ + रभ् (१ आ.प.) रब्ध्वा आरभ्य आरब्धुम् आ + रुह्-रोह् (१ प.प.) .. आरुह्य आरोढुम् आ + लिख् (६ प.प.) .. विलिख्य लेखितुम् आ + लिङ्ग् (१ प.प.) .. आलिङ्ग्य आलिङ्गितुम् आ + वृ (५ उ.प.) .. आवृत्य आवरितुम्, आवरीतुम् आ + वृत्-वर्त् (१ आ.प.) .. आवृत्य आवर्तितुम् आ + शास् (२ आ.प.) .. आशास्य आशासितुम् आ + श्लिष् (४ प.प.) .. आश्लिष्य आश्लेष्टुम् आ + स्तृ (५ उ.प.) .. आस्तृत्य आस्तर्तुम् आ + स्था-तिष्ठ् (१ प.प.) .. आस्थाय आस्थातुम् आ + हृ-हर् (१ उ.प.) .. आहृत्य आहर्तुम् आ + ह्वे-ह्वय् (१ उ.प.) .. आहूय आह्वेतुम् आप् (५ प.प.) आप्त्वा आप्तुम् आस् (२ प.प.) आसित्वा उपास्य आसितुम् इ (२ प.प.) इत्वा उपेत्य एतुम् ईक्ष् (१ आ.प.) ईक्षित्वा निरीक्ष्य ईक्षितुम् ईश् (२ आ.प.) ईशित्वा .. ईशितुम् उद् + ईर् (१० उ.प.) .. उदीर्य उदीरयितुम् उद् + घुष्-घोष् (१० उ.प.) .. उद्घोष्य उद्घोषयितुम् उद् + छिद् (७ उ.प.) .. उच्छिद्य उच्छेत्तुम् उद् + धृ-धर् (१ प.प.) .. उत्धृत्य उद्धर्तुम् उद् + विज् (६ आ.प.) .. उद्विज्य उद्विजितुम् उद् + स्था-तिष्ठ् (१ प.प.) .. उत्थाय उत्थितुम् उद् + हृ-हर् (१ उ.प.) .. उद्धृत्य उद्धर्तुम् उप + कृ (८ उ.प.) .. उपकृत्य उपकर्तुम् उप + भुज् (७ आ.प.) .. उपभुज्य उपभोक्तुम् उप + रुध् (७ उ.प.) .. उपरुध्य उपरोद्धुम् उप + विश् (६ प.प.) .. उपविश्य उपवेष्टुम् उप् + आस् (२ प.प.) .. उपास्य उपासितुम् कथ् (१० उ.प.) कथयित्वा प्रकथ्य कथयितुम् कम् (१ आ.प.) कामयित्वा .. कामयितुम् कम्प् (१ आ.प.) कम्पित्वा .. कम्पितुम् स्त्रोत - संस्कृतदीपिका