योजना का उद्देश्य भारत वर्ष के 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को कम से कम प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 1 से 8वीं तक) उपलब्ध कराना है। योजना के मुख्य प्रावधान स्कूल द्वारा बच्चों से कोई फीस/शुल्क/व्यय नहीं लिया जाएगा। शिक्षा सत्र के दौरान बच्चे को स्कूल में प्रवेश देने से इन्कार नहीं किया जाएगा। स्कूल में किसी बच्चें को शारीरिक दण्ड (मार-पीट, मुर्गा बनाना, बैंच पर खड़ा करना आदि) और मानसिक उत्पीड़न (जाति व धर्म सूचक शब्द, शारीरिक विकलांगता के शब्दों का प्रयोग या किसी अन्य तरह से) नहीं किया जाएगा। हर स्कूल में एक पुस्तकालय होगा, जिसमें अखबार, पत्रिका सभी विषयों और कहानी की किताबें भी उपलब्ध होगीं। स्कूल में खेल का मैदान होना चाहिए, जहाँ बच्चें खेल सके तथा हर कक्षा को जरूरत के अनुसार खेल-कूद का सामान उपलब्ध कराया जाएगा। प्राथमिक शिक्षा पूरी होने तक बच्चों की बोर्ड की परीक्षा नहीं ली जाएगी, किसी बच्चे को किसी कक्षा में फेल नहीं किया जाएगा व किसी कारण से किसी बच्चे का नाम काटकर उसे स्कूल से नहीं निकाला जाएगा। बच्चों के लिए साफ एवं पर्याप्त मात्रा में पीने के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था की जाएगी (शौचालय बच्चों के उपयोग के लिए है, अतः उनमें ताला नहीं लगाया जाएगा)। स्कूल में रसोई घर होना चाहिए, जहाँ बच्चों के लिए दोपहर का भोजन पकाया जा सके। पहली से पांचवी कक्षा के लिए वर्ष में 200 कार्य दिवस तय किए गए हैं यानि 200 दिन स्कूल में पढ़ाई होगी। छठी से आठवीं कक्षा के लिए वर्ष में 220 कार्य दिवस तय किए गए हैं यानि 220 दिन स्कूल में पढ़ाई होगी। शिक्षक सप्ताह में कम से कम 45 घंटे पढ़ाई का कार्य करेंगे, इसमें पढ़ाने हेतु तैयारी के घंटे भी शामिल है। दिव्यांग बच्चों को शिक्षा और सीखने से संबंधित विशेष सहायक सामग्री उपलब्ध करायी जाएगी और यदि स्कूल दूर है तो ऐसे बच्चों के आने जाने के लिए वाहन की व्यवस्था की जाएगी। हर स्कूल में रैम्प (आने जाने का ढ़ाल दार रास्ता) बनाया जाएगा ताकि उनको अंदर आने जाने में असुविधा न हो। प्राथमिक शिक्षा पूरी होने पर बच्चे को स्कूल के मुख्याध्यापक द्वारा प्राथमिक शिक्षा पूरी होने का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। यह प्रमाण पत्र सिर्फ कुछ विषयों पर केन्द्रित नहीं होगा बल्कि इसमें बच्चों की संपूर्ण उपलब्धियों को देखा जाएगा। इन उपलब्धियों में संगीत, नृत्य, साहित्य, खेल आदि विषय भी शामिल किये जा सकते हैं। पड़ोसी स्कूल कक्षा पहली से पांचवी तक के लिए घर/बस्ती से स्कूल की दूरी 1 कि.मी. तक होगी ताकि बच्चे आसानी से स्कूल पहुँच सकें। कक्षा छठी से आठवीं तक के बच्चों के लिए घर/बस्ती से स्कूल की दूरी 3 कि.मी. तक होगी ताकि बच्चे आसानी से स्कूल पहुँच सकें। स्कूल से बाहर के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार यदि कोई बच्चा जिसकी उम्र 6 वर्ष से अधिक है और वह कभी स्कूल नहीं गया है या बीच में पढ़ाई छोड़ दी थी तो उसे उसकी उम्र के अनुसार कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। उदाहरण के लिए यदि बच्चा 12 साल का है तो छठी कक्षा में और 14 साल का है तो आठवीं कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। इस प्रकार दाखिल किए गए बच्चों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि कक्षा के अन्य बच्चों के समान स्तर पर आ सके और जब वे उस स्तर को प्राप्त कर लेंगे तो उन्हें उनकी कक्षा में शामिल कर दिया जाएगा। जिन बच्चों को 6 वर्ष से अधिक उम्र होने पर स्कूल में दाखिल किया जाएगा और जो 14 वर्ष की उम्र तक अपनी प्राथमिक शिक्षा (आठवीं कक्षा तक) पूरी नहीं कर पाए तो 14 वर्ष से ज्यादा उम्र होने पर भी उन्हें निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिलेगा। जन्म प्रमाण-पत्र हर बच्चे को स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा चाहे उसके पास आयु का सबूत है या नहीं है। स्कूल में प्रवेश के लिए आयु के सबूत के रूप में जन्म, मृत्यु और विवाह रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1886 के उपबंधों के अनुसार जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्रए अस्पताल या ए.एन.एम के रजिस्टर में दर्ज बच्चे के जन्म की जानकारीए आंगनवाड़ी केन्द्र के रजिस्टर में दर्ज बच्चे के जन्म की जानकारी या बच्चे के माता-पिता या अभिभावक लिखित में स्वयं घोषणा के द्वारा बच्चे के जन्म या उसकी उम्र के बारे में जानकारी दे सकते हैं। स्कूल प्रबंधन समिति इस कानून के लागू होने के 6 माह के अन्दर सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा। स्कूल प्रबंधन समिति में 12-20 सदस्य होंगे जोकि स्कूल में बच्चों की संख्या पर निर्भर करेगा। इस समिति की 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएं होनी चाहिए। 1-300 विद्यार्थी- 12 सदस्य 301-500 विद्यार्थी - 16 सदस्य 500 से ज्यादा विद्यार्थी - 20 सदस्य सदस्य प्रतिशत 1. बच्चों के माता-पिता/अभिभावक कम से कम तीन चौथाई (75%) प्रतिनिधित्व बच्चों के माता-पिता/अभिभावक का होना चाहिए, जिनमें से कुछ माता-पिता कमजोर वर्ग के होने चाहिये I 2. ग्राम पंचायत/ नगर निकाय के प्रतिनिधि/ समाजसेवी 25% का एक तिहाई 3. शिक्षक 25% का एक तिहाई 4. स्थनीय शिक्षाविद् या स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी 25% का एक तिहाई स्कूल प्रबंधन समिति के अभिभावक सदस्यों का चयन आम सहमति से किया जाएगा, परंतु स्कूल की प्रत्येक कक्षा के कम से कम एक बच्चे के अभिभावक का प्रतिनिधित्व समिति में अवश्य होगा। स्कूल प्रबंधन समिति के अभिभावक सदस्यों में से एक-एक सदस्य स्कूल मे पढ़ने वाले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़े वर्ग के बच्चों के माता-पिता/अभिभावक होंगे। स्कूल प्रबंधन समिति के संचालन हेतु समिति के सदस्यों में से एक अध्यक्ष एवं एक उपाध्यक्ष का चयन किया जाएगा व स्कूल का मुख्याध्यापक सदस्य सचिव होगा। मुख्याध्यापक की अनुपस्थिति में स्कूल का वरिष्ठ शिक्षक सदस्य सचिव का कार्य करेगा। स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक महीने में कम से कम एक बार होगी व इस बैठक की कार्यवाही और निर्णयों को रजिस्टर में लिखा जाएगा। समिति द्वारा लिए गए निर्णय व मीटिंग की कार्यवाही जनता के लिए उपलब्ध होगी। अधिक जानकारी के सम्पर्क करें जिला स्तर जिला शिक्षा अधिकारी (डी.ई.ओ.) कार्यालय जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (डी.ई.ई.ओ.) कार्यालय राज्य स्तर डायरेक्टर (मौलिक शिक्षा निदेशालय) हरियाणा, प्लाट नंबर: 1-बी, पहली मंजिल, शिक्षा सदन, सेक्टर-5, पंचकूला-134190. फोन नंबर - 0172-2560189, 3262073 स्रोत: एस एम सहगल फाउंडेशन