<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify;">परिचय</h3> <p style="text-align: justify;">बिहार के सहरसा के सिमरी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के दौरान अपनी परेशानी देख संकल्प लिया था कि उससे जितना संभव हो पायेगा, दूसरे छात्रों की मदद करेंगे। नौकरी में जाने के नौ वर्षों बाद भी उस संकल्प को लगातार निभा रहे हैं। इतना ही नहीं जहां भी पदस्थापन हुआ, वहीं के छात्रों को तैयारी करने में मदद करते रहे हैं। कई छात्रों को मिल चुकी है सफलता समस्तीपुर रेल मंडल के हरिनगर रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर के पद पर पदस्थापित बघवा गांव निवासी शिशिर कुमार राय ऐसे शिक्षा प्रेमी व पढ़ाई के उत्प्रेरक का नाम है। जो पढ़ाई के दौरान किसी भी तरह की बाधा को नहीं देखना चाहते हैं। वे नहीं चाहते कि गरीब घर के मेधावी बच्चे पैसों की खातिर किसी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी न कर सकें।</p> <h3 style="text-align: justify;">खुद के जीवन से ली प्रेरणा; आज बच्चों के हैं मार्गदर्शक</h3> <p style="text-align: justify;">किसी बड़े इंस्टीच्यूट में दाखिला नहीं ले पाने के कारण उनका ज्ञान सड़कों रह ही भटकता रह जाये। लिहाजा ड्यूटी के बाद बचे समय में वैसे बच्चों को वे खुद पढ़ाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उन्होंने बघवा व रामपुर में बाबूधाम शिक्षण संस्थान भी खोल दी है। जहां ऐसे छात्रों को नि :शुल्क शि क्षा दी जा रही है। उनकी तैयारी कराने के लिए उन्होंने अपने स्तर से सुयोग्य शिक्षकों की टीम खड़ी की है। छुट्टी में घर आने पर शिशिर अपना अधिक से अधिक समय तैयारी कर रहे उन्हीं छात्रों के साथ बिताते हैं। सकारात्मक परिणाम भी सामने है कि उनके छात्र हर साल विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पा रहे हैं और इस संस्थान से सफलता पाने वाले अन्य छात्र भी छुट्टी के दौरान संस्थान के छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">रेलवे में नौकरी के साथ बच्चों को पढ़ाने में आता है उत्साह</h3> <p style="text-align: justify;">सहरसा जिले के बघवा गांव निवासी शंभू नाथ राय के पुत्र शिशिर कुमार राय को वर्ष 2007 में रेलवे बोर्ड अजमेर की प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता के बाद स्टेशन मास्टर की नौकरी मिली। पहली पदस्थापना राजस्थान के जोधपुर में हुई। वहां भी उन्होंने ड्यूटी के बाद प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले वैसे छात्रों का पता कर उन्हें पढ़ाया। उसके बाद बंगाल के मालदा स्टेशन पर पदस्थापित हुए। वहां भी एक कोचिंग संस्थान में नि :शुल्क अध्यापन किया। फिर उनका तबादला समस्तीपुर रेलमंडल के हरिनगर स्टेशन पर हुआ। यहां भी ड्यूटी के बाद नियमित रूप से शिक्षादान कर रहे हैं।</p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में पढ़ाई के दौरान प्रतियोगिता परीक्षा में होने वाली परेशानियों को को काफी करीब से देखा था। उसी समय यह संकल्प लिया था कि अपनी सफलता के बाद वैसे अन्य छात्रों को सहयोग करेंगे।</p> <p style="text-align: justify;">नौकरी मिलने के बाद सबसे पहले अपने गांव के तैयारी करने वाले वैसे छात्रों को जमा कर उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। खुद पढ़ाया। मार्गदर्शक शिक्षकों की व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि जहां भी उनकी ड्यूटी लगती है। वहां के छात्र-छात्राओं को प्रति योगिता परीक्षा की तैयारी करते हैं और उन्हें हिम्मत नहीं हारने का हौसला देते हैं। शिशिर ने बताया कि छात्रों को पढ़ाने में उन्हें असीम खुशी मिलती है। कहा कि उनके बाद गांव के अन्य युवा भी सरकारी नौकरी पाने के बाद उनके काम में हाथ बंटा रहे हैं।</p> <p style="text-align: justify;"><strong>लेखन : संदीप कुमार</strong><strong>, स्वतंत्र पत्रकार</strong></p> </div>