परिचय बच्चे के जीवनकाल के शुरुआती कुछ वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इस दौरान उनकी वृद्धि और विकास की गति बहुत तीव्र होती है।बच्चे के विकास के लिए और अच्छी आदत सीखने के लिए एक अनुकूल तथा स्वच्छ वातावरण मिलना आवश्यक होता है । बच्चों को सिखाने के लिए हमें उन्हें रुचिकर, अर्थपूर्ण तथा मनोरंजक गतिविधियों के अवसर तथा माहौल प्रदान करना चाहिए। इस प्रकार हम पूर्व प्राथमिक तथा प्राथमिक स्कूलों में इस कमी को काफ़ी सीमा तक दूर कर सकते हैं। बच्चों के जीवन में खेलों का अत्यंत महत्व है। साफ़-सफ़ाई व स्वच्छता, शिक्षा का एक अनिवार्य क्षेत्र है।सामुदायिक साफ़-सफ़ाई एवं स्वच्छता तथा बच्चों के शुरुआती वर्षों में स्वच्छता-संबंधी आदतों को डालने की दृष्टि से यह पुस्तक 'दर्पण' एक अति महत्वपूर्ण तथा सराहनीय प्रयास है। इस पुस्तक में साफ़-सफ़ाई कायम रखने के तरीके रोचक गतिविधियों के माध्यम से बताए गए हैं। साफ़-सफ़ाई रखने की रोचक गतिविधियां कीटाणु जासूस बच्चों को गोल दायरे में बैठना है और एक आवर्धक काँच (magnifying glass) लेकर बारी-बारी से प्रत्येक बच्चे के हाथों की जाँच करनी है । उन्हें दिखाएँ कि आवर्धक लेंस के नीचे हमारे हाथों की गंदगी कैसी दिखती है। अब बच्चों के हाथ धुलवाकर, फिर आवर्धक लेंस के नीचे हाथों की जाँच करें तथा चर्चा करें कि हाथों को धोना कितना ज़रूरी है। कठपुतली दोस्त (पपेट हेल्पर) एक कठपुतली लेकर उसकी सहायता से हाथ धोने और नहाने के महत्व पर चर्चा करें। कठपुतली के साथ एक अलग आवाज़ में बातचीत करें। कक्षा में एक छोटा-सा टब लें । उसमें कपड़े अथवा प्लास्टिक की गुड़िया रखें। शरीर के विभिन्न भागों को कैसे साफ़ करते हैं, बताएँ, जैसे बाल, हाथ, बाँह, पैर आदि। छोटे बच्चों के साथ स्वच्छता संबंधी आदतों के विकास के लिए यह आवश्यक है कि बच्चों के वातावरण को साफ़-सुथरा रखा जाए। बचपन में ही साफ़-सफ़ाई की आदतें डाल कर एक अच्छा उदाहरण स्थापित करें और बच्चों को एक खुशनुमा, स्वच्छ वातावरण दें, बदले में आपको स्वस्थ बच्चे मिलेंगे। इस पुस्तिका में कुछ सुझावात्मक स्वच्छता संबंधी वर्कशीट भी दी गई हैं, जो छोटे बच्चों को अच्छी आदतें सिखाने में आपकी मदद करेंगी। मिलान खेल बच्चों की व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए एक मिलान खेल बनाएँ । उदाहरण के तौर पर कार्डों पर साबुन, टूथब्रुश, नेल कटर और माउथ वॉश के चित्र बनाएँ या चित्र काट कर चिपका दें। फिर दूसरे कार्डों के सेट पर दाँत, हाथ, नाखून व मुँह का चित्र बनाएँ या चिपकाएँ। सभी चित्रकार्डो को मिला दें और बच्चों के छोटे समूह बनाकर उन्हें चित्रकार्डों का मिलान करने को कहें। आप इस आधार पर वर्कशीट भी बना सकती हैं। 4. क्या अच्छा, क्या बुरा? कागज़ के एक नाप के दस टुकड़े लें और प्रत्येक पर स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतों को लिखें, जैसे दाँतों को ब्रुश करना, छींकते समय नाक पर रुमाल रखना आदि। इसी तरह कागज़ की अन्य पर्चियों पर दस बुरी आदतों को लिखें, जैसे नाक-कान में उँगली डालना, मुंह में पेंसिल डालना आदि । अब सभी पर्चियों को मोड़ लें और एक छोटी टोकरी या थैली में डाल लें। बच्चों के छोटे-छोटे समूह बनाएँ और प्रत्येक बच्चे को एक-एक पर्ची उठाने के लिए कहें। अब बच्चों से उन पर्चियों को पढ़कर अपनी समझ से स्वयं निर्धारित करने दें कि वह स्वच्छता संबंधीअच्छी आदत है या बुरी आदत । कक्षा में इस पर चर्चा करवाएँ। बूझो मेरा एक्शन यह खेल पूरी कक्षा के साथ करवाएँ। पहले स्वयं कोई भी स्वच्छता संबंधी एक्शन, जैसे नहाने की क्रिया का एक्शन बिना बोले करें और सभी बच्चों को बताने को कहें कि आप क्या कर रहे थे। बच्चों के सही बताने पर ताली बजवाएँ तथा नहीं बताने पर दूसरे बच्चों से पूछे । इस तरह एक-दो एक्शन करने के बाद बच्चों से एक्शन करवाएँ। उसके बाद बारी-बारी से प्रत्येक बच्चे को कोई स्वच्छता संबंधी एक्शन करने को कहें और पूछे कि क्या क्रिया/एक्शन हो रहा है। बाद में आप बच्चों से उस स्वच्छता संबंधी आदत को सही रूप से करने के बारे में बातचीत करें। ग्लिटर चेक यह एक बहुत अच्छी गतिविधि है जो छोटे बच्चों को हाथ धोने के महत्व को ग्लिटर के उपयोग के माध्यम से बताती है। बच्चों के हाथों पर थोड़ा-सा ग्लिटर (चमकी) छिड़क दें और फिर बच्चों को अपने हाथों को साबुन और पानी से धोने को कहें। क्योंकि ग्लिटर स्वाभाविक रूप से चिपचिपा होता है तो बच्चों को उसे हटाने के लिए कम-से-कम 30 सेकेंड तक का समय लग जाएगा। इस प्रकार बच्चों को समझाएँ कि हाथों को भली प्रकार रगड़कर धोने से ही सारे कीटाणुओं / रोगाणुओं को फैलने से रोका जा सकता है।इसी तरह से बच्चों को बताएँ कि जब हम छींकते हैं तो हमें अपने नाक व मुँह को रुमाल से ढकना चाहिए अन्यथा रोगाणु हाथों के स्पर्श के माध्यम से फैल जाएँगे। क्या तुमने अपने हाथ ठीक से धोए बच्चों को हाथ धोने का सही तरीका दिखाएँ और भोजन से पहले व बाद में, शौचालय के प्रयोग के बाद, छींकने के बाद तथा बाहरी (आउटडोर) खेलों के बाद अच्छी तरह से हाथों को साबुन से रगड़ कर धोने को कहें। बच्चों से चर्चा करके या कहानी के माध्यम से यह भी बताएँ कि हमें अपने पालतू पशुओं से खेलने के बाद, उन्हें छूने के बाद तथा किसी बीमार दोस्त को देखने के बाद भी अपने हाथों को भली-भाँति धोना चाहिए। बच्चों से हाथ धोने का सही अभ्यास कराएँ हाथों को गीला करें। साबुन मलें। लगभग 20-30 सेकेंड तक साबुन वाले हाथों को रगड़ें। उँगलियों के बीच की जगह में अच्छी तरह रगड़ें। हाथों को भली प्रकार पानी से धोएँ। नल बंद करें। तौलिए से हाथों को पोंछे । हाथों को धोते समय नीचे लिखी बातों को अवश्य ध्यान में रखें नल को हमेशा दाएँ हाथ से खोलें व बंद करें। पहले बाएँ हाथ को साबुन से मलकर धोएँ। उसके बाद दोनों हाथों को रगड़ कर, मलकर पानी से अच्छी तरह धोएँ। छोटे बच्चों को विशेष रूप से हाथ धोने की प्रक्रिया को करके दिखाएँ। हाथ धोएँ फिर खाना खाएँ बच्चों के भोजन का समय एक अच्छा अवसर होता है जब आप एक-दूसरे के साथ बाँट कर खाने, खाने की आदतों, स्वच्छता-संबंधी आदतों और पौष्टिक खाने के बारे में बात कर सकती हैं। भोजन करते समय यदि बड़े भी साथ बैठे और बच्चों के साथ भोजन करें तो बच्चे सामाजिक कौशलों का भली-भाँति अभ्यास कर पाते हैं। खेल-खेल में कविता गाएँ बच्चो को कविता की धुन क्र आधार पर स्वछता के बारे में समझाना चाहिए जैसे रो-रो-रो योर बोट' की धुन पर हाथ धो लो हाथ धो लो हाथ धो लो आओ खेलें हाथों का खेल' हम सब । मलो और रगड़ो रगड़ो और मलो सारे कीटाणुओं का सफ़ाया कर दो अब॥ आधी छुट्टी “हो गई आधी छुट्टी रे आए छोले पूरी रे। लेकिन खाने से पहले मैं हाथों को तो धो लूँ रे॥ साप्ताहिक चार्ट एक चार्ट बनाएँ जिस पर क्रमानुसार कक्षा के बच्चों का नाम लिखें और आगे बनी तालिका में जितनी बार बच्चे हाथ धोएँगे, वहाँ सही का निशान लगाएँगे। साप्ताहिक स्वच्छता – मैंने हाथों को धोया उदाहरण क्र, सं बच्चों के नाम भोजन से पहले भोजन के बाद शौचालय के बाद खेलने के बाद नाक साफ़ करने के बाद सोम मंगल बुद्ध गुरु शुक्र शनि '' '' '' '' 1 रानी ✔ ✔ ✔ ✔ ✔ 2 पूजा ✔ ✔ ✔ ✔ ✔ शिक्षक कक्षा के सभी बच्चों को शौचालय के प्रयोग संबंधी जानकारी दें। शिक्षक शौचालय के प्रयोग तथा सही उपयोग के महत्व के बारे में बच्चों व उनके अभिभावकों को जागरूक करें। दाँतों की देखभाल अपने दाँतों का ध्यान रखना हमारे लिए बहुत आवश्यक है, क्योंकि एक बार जन्म के दाँत टूटने पर जो नए दाँत आते हैं, यदि वे टूट जाएँ तो फिर कभी दुबारा नहीं आते। इन्हें ठीक से साफ़ रखने की ज़रूरत होती है। अस्वस्थ और गंदे दाँत सुंदर भी नहीं दिखते । बच्चों से चर्चा करें कि हम अपने दाँतों की देखभाल कैसे कर सकते हैं। जैसे नियम से दोनों समय (सुबह और रात) दाँतों को ब्रुश करना; मटर के दाने जितना टूथपेस्ट ब्रुश पर लगाना; कम-से-कम दो मिनट तक ब्रुश करना (खासतौर से मीठी चीजें खाने के बाद। दाँतों को ऊपर नीचे,आगे पीछे, ब्रुश करना तथा जीभ साफ़ करना; खाने के बाद अच्छी तरह कुल्ला करना; दाँतों के डाक्टर के पास नियमित अंतराल पर जाना; कैल्शियम युक्त उत्तम भोजन खाना। अभिभावकों को यह भी बताएँ दाँतों को ब्रुश करना एक मजेदार व रोचक क्रिया के रूप में प्रस्तुत करें। बच्चों को ब्रुश करने का सही तरीका दिखाएँ और अभ्यास करने को कहें। दाँतों को मंजन / ब्रुश करने पर कविता / गीत गाएँ। खुश दाँत और उदास दाँत पर कहानी बनाएँ और सुनाएँ। पर्ची निकालो और सीखो पर्चियों पर कुछ सही व कुछ गलत आदतें लिखकर अथवा उनका चित्र बनाकर एक गत्ते के डिब्बे में रखें। बच्चों को बारी-बारी से एक पर्ची निकालने को कहें। एक बच्ची पर्ची पढ़ेगी और जो लिखा हो, वैसा अभिनय करेगी। बच्ची को पर्ची पर लिखा हुआ ज़ोर से पढ़ने के लिए कहें। यदि न पढ़ पाए तो आप पढ़ने में उसकी मदद करें। बाकी बच्चे उस बच्ची का अभिनय देखकर बताएँगे कि उस बच्ची ने क्या किया। वह एक अच्छी आदत थी या गलत? सही होने पर सभी बच्चे ताली बजाएँगे। कुछ पर्चियों पर ऐसे लिखा जा सकता है, जैसे - केला खाकर छिलका कचरे के डिब्बे में फेंकना। संतरा छीलकर, छिलके खिड़की से बाहर फेंकना। भोजन के पहले और बाद में हाथों को धोना। ब्रुश करने के लिए नल खोलना, ब्रुश करना, नल बंद करना। घड़े में हाथ डालकर गिलास से पानी निकालना। समझो और बताओ हमारे शरीर की स्वच्छता के लिए क्या सही है? कभी-कभी नहाना या नियमित रूप से नहाना? क्यों? साफ़-सुथरे कपड़े पहनना क्यों ज़रूरी है? पानी का सही उपयोग किस स्थिति में है? बाल्टी से नहाने में या फव्वारे से नहाने में? क्यों? हमें लंबे नाखून रखने चाहिए या नियमित रूप से काटने चाहिए? क्यों? ढूँढ़ो और चिपकाओ साबुन, टूथपेस्ट, शैम्पू, मंजन, दातुन आदि पर बच्चों से बातचीत करें। फिर बच्चों को पुरानी मैगज़ीन, अखबार आदि दें और इन वस्तुओं से संबंधित विज्ञापनों को काटने को कहें। फिर एक वर्कशीट या चार्ट पेपर पर इन विज्ञापनों के चित्रों को चिपका कर कोलॉज (Collage)बनाने को कहें। हाँ जी हाँ, ना जी ना तुम खाना खाते हो? हाँ जी हाँ, हाँ जी हाँ तुम खाने से पहले हाथ धोते हो। ना जी ना, ना जी ना खाने की हाँ, हाथ धोने की ना, ऐसे कैसे चले जहाँ। (कमला भसीन द्वारा रचित मूल कविता के आधार पर) पहेलियाँ बूझो खूब सारा मैं झाग बनाऊँ, सारे शरीर को साफ़ कराऊँ। ऊपर नीचे मुझे चलाओ, दाँतों के कीड़े भगाओ। बालों में मुझे फेरते जाओ, साफ़ सुंदर चेहरा पाओ। प्यास लगे तो मुझको पियो, नहाओ और हाथ धोओ। छींक आए तो मुँह पर रखो, नाक आए तो मुझसे पोंछो। | (i) साबुन (ii) टूथब्रश (iii) कंघा (iv) पानी (v) रुमाल आओ कठपुतली बनाएँ “चीनू-मीनू की कहानी हमारी ज़ुबानी" मैं एक छोटा-सा गुड्डा,नाम है मेरा चीनू- सुबह-सवेरे रोज़ नहाऊँ उजला होकर शाला जाऊँ हर कोई चाहे मेरा साथ क्यों? क्यों अम्माँ क्यों ? मैं भी एक छोटी-सी गुड़िया, नाम है मेरा मीनू सुबह-सवेरे उठ न पाऊँ बिना नहाए शाला जाऊँ कोई करे न मुझसे बात। क्यों? क्यों अम्माँ क्यों ? शिक्षक निर्देश – बच्चों से कठपुतली बनवाएँ । इसके लिए उन्हें सरकंडे, आइसक्रीम की चम्मचें, बटन, ऊन के टुकड़े, पुराने कागज़ आदि दें । कठपुतली बनाने के बाद बच्चों से कहें कि अपनी-अपनी कठपुतली का नाम रखें और अब एक कहानी बनाएँ । ऊपर दी गई कविता गवाकर उसके उत्तर बच्चों से ही निकलवाएँ। कहानियाँ आप भी ऐसी ही कुछ कहानियाँ ढूँढें, बनाएँ और बच्चों को रोचक तरीके से सुनाएँ । सुनाई गई कहानियों पर अभिनय करवाएँ और साथ ही बच्चों को छोटे समूह में स्वयं कहानी बनाने के लिए प्रेरित करें। जैसे खुश दाँत और उदास दाँत एक बार की बात है, एक बच्चा था मोनू । मोनू के दाँत बहुत खुश रहते थे, क्योंकि मोनू के दाँतों में कोई कीड़ा नहीं था, वे काले भी नहीं थे और जब वह खाना खाता था या ठंडा पानी पीता था तो उसके दाँतो में दर्द भी नहीं होता था। मोनू का बहुत अच्छा दोस्त था सोनू । सोनू के दाँत बहुत उदास रहते थे क्योंकि उसके दाँत धीरे-धीरे पीले होते जा रहे थे और वह जब भी कुछ खाता था, तो उसके दाँत में बहुत दर्द होता था।एक दिन मोनू, सोनू के घर खेलने गया तो उसने देखा कि सोनू अपने मुँह पर हाथ रखकर उदास बैठा है। उसने सोनू से पूछा, “तुम इतने उदास क्यों हो ?” सोनू बोला कि मेरे दाँत में बहुत दर्द हो रहा है और मुझसे कुछ भी खाया नहीं जा रहा है। मोनू ने पूछा, “ऐसा क्यों हो रहा है?" सोनू ने बताया कि वह बहुत ज़्यादा टॉफ़ी, चॉकलेट, आइसक्रीम खाता है और ये सब खाने के बाद कुल्ला भी नहीं करता है। तभी मोनू ने कहा, “अच्छा, अब समझ में आया कि तुम अपने दाँतों को स्वस्थ रखने के लिए दूध, अंडा, फल, हरी सब्ज़ी कुछ नहीं खाते और दो बार ब्रुश भीनहीं करते । इसलिए तुम्हारे दाँत उदास दाँत हैं और मेरे दाँत खुश दाँत है क्योंकि मैं ये सब चीजें खाता हूँ।” सोनू ने कहा, “अब मैं अपने उदास दाँतों को खुश दाँत बनाऊँगा। खीरा खाऊँ कचर कचर भाजी का बड़ा खेत था। खेत में बहुत-सी बेलें थी, कद्दथे, तरबूज़ थे, खरबूज़े थे, ककड़ियाँ थीं और खीरे तो थे बहुत-बहुत । वहाँ आया एक कौआ, “आहा, कितने अच्छे हैं ये खीरे । चलो खाऊँ मैं इनको कचर-कचर।कौआ गया बेल के पास ।ज्यों ही उसने खीरे में चोंच मारी, बेल बोली – “ठहर जा भाई। तेरी चोंच कितनी गंदी है। पहले पानी से अच्छी तरह धो ले और फिर खा कचर-कचर कौआ गया बावड़ी के पास“बावड़ी बावड़ी, बावड़ी दीदी, आँगन में आया है कौआ भाई। दे थोड़ा पानी, धो लूँ ज़रा चोंच। खीरा खाऊँगा कचर-कचर।” बावड़ी बोली- “ले न भाई पानी। पर तू लेगा किसमें? एक मटका ले आ और चाहे जितना पानी भर ले।" रौमिला सोनी (सहायक प्रवक्ता प्रारंभिक शिक्षा विभाग)